झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार बैजनाथ राम ने जीत दर्ज कर ली है। वहीं, चुनावी मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। मतगणना पूरी होने के बाद विजयी उम्मीदवारों के समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा गया।

दिलचस्प रहा राज्यसभा चुनाव का मुकाबला

इस बार राज्यसभा चुनाव में मुकाबला काफी रोचक माना जा रहा था। झामुमो की ओर से बैजनाथ राम चुनाव मैदान में थे, जबकि भाजपा और एनडीए समर्थित उम्मीदवार के रूप में परिमल नाथवानी ने चुनाव लड़ा। दूसरी ओर निर्दलीय उम्मीदवार प्रणव झा भी अपनी दावेदारी को मजबूत बनाने में जुटे रहे। हालांकि विधानसभा में संख्या बल और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर बैजनाथ राम और परिमल नाथवानी को शुरुआत से ही मजबूत दावेदार माना जा रहा था।

तीन वोट घोषित हुए अमान्य

मतगणना के दौरान कुल तीन वोट अमान्य घोषित किए गए। इसकी पुष्टि राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी की। जानकारी के अनुसार परिमल नाथवानी को कुल 30 वोट प्राप्त हुए थे, लेकिन इनमें से दो मत अमान्य पाए गए। इसके बाद उनके खाते में 28 वैध वोट बचे, जो जीत के लिए आवश्यक संख्या थी। वोट रद्द होने के बावजूद उनकी जीत पर कोई असर नहीं पड़ा।

बैजनाथ राम को मिला महागठबंधन का समर्थन

झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम को महागठबंधन के विधायकों का व्यापक समर्थन मिला। गठबंधन के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल होने के कारण उनकी जीत पहले से ही लगभग तय मानी जा रही थी। मतगणना के दौरान भी यह स्थिति स्पष्ट दिखाई दी और उन्होंने आसानी से जीत हासिल कर ली।

प्रणव झा को नहीं मिला अपेक्षित समर्थन

निर्दलीय उम्मीदवार प्रणव झा ने चुनाव में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका। विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक गणित में उनके पक्ष में पर्याप्त संख्या नहीं जुट पाई, जिसके चलते उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

समर्थकों में जश्न का माहौल

चुनाव परिणाम घोषित होते ही परिमल नाथवानी और बैजनाथ राम के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। दोनों नेताओं को बधाइयां देने वालों का तांता लग गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम झारखंड विधानसभा में दलों की मौजूदा ताकत और राजनीतिक समीकरणों को भी दर्शाता है।

अब दोनों नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य संसद के उच्च सदन में झारखंड का प्रतिनिधित्व करेंगे और राज्य के विकास तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जिम्मेदारी निभाएंगे।

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