रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित ऐतिहासिक लोक भवन (पूर्व राजभवन) अपने भव्य स्थापत्य और विरासत के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन इस भवन से जुड़ा एक ऐसा रहस्य भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ब्रिटिश शासनकाल में निर्मित इस इमारत के भीतर दो भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं, जिनके प्रवेश द्वार आज भी दरबार हॉल और डाइनिंग हॉल के पास बने हुए हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों से इन दोनों द्वारों को वर्षों पहले बंद कर दिया गया था।

दरबार हॉल और डाइनिंग हॉल से जुड़ी हैं सुरंगें

झारखंड लोक भवन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, भवन के ग्राउंड फ्लोर पर बने दो ट्रैपडोर भूमिगत सुरंगों से जुड़े हैं, जो किसी गुप्त स्थान की ओर जाती हैं। लंबे समय से इन सुरंगों को नहीं खोला गया है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि इनका अंतिम छोर कहां है।

हेरिटेज एक्टिविस्ट श्रीदेव सिंह के अनुसार, अंग्रेजी शासन के दौरान महत्वपूर्ण सरकारी भवनों में आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए इस तरह की सुरंगों का निर्माण कराया जाता था। लोक भवन की ये सुरंगें भी उसी उद्देश्य से बनाई गई थीं।

1931 में बनकर तैयार हुआ था लोक भवन

लोक भवन का निर्माण वर्ष 1930 में शुरू हुआ था और 1931 में लगभग सात लाख रुपये की लागत से यह भवन तैयार हुआ। उस समय रांची, एकीकृत बिहार की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। इस भवन के वास्तुकार सैडलो बलार्ड थे, जिन्होंने ब्रिटिश वास्तुकला के साथ स्थानीय जलवायु और परिवेश को ध्यान में रखकर इसका डिजाइन तैयार किया।

भवन की छत 18 से 20 फीट ऊंची और दीवारें लगभग 14 इंच मोटी हैं। छत पर रानीगंज की विशेष टाइल्स का उपयोग किया गया, जबकि कुछ टाइल्स पर “मेड इन इंग्लैंड” अंकित होने से माना जाता है कि उन्हें ब्रिटेन से मंगाया गया था।

ऐतिहासिक धरोहरों से सजा है दरबार हॉल

लोक भवन का दरबार हॉल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। यहां एंग्लो-फ्रेंच कलाकार डैनिएल द्वारा वर्ष 1796 में बनाई गई 12 दुर्लभ पेंटिंग्स सुरक्षित रखी गई हैं। इसके अलावा झारखंड के प्रसिद्ध फोटोग्राफर बिशु नंदी की तस्वीरें भी यहां प्रदर्शित हैं, जो राज्य की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाती हैं।

दरबार हॉल में ब्रिटिश काल का भव्य झूमर, मनोरंजन कक्ष में पुराना बिलियर्ड टेबल तथा केरोसिन से चलने वाला पंखा और रेफ्रिजरेटर जैसी दुर्लभ एंटीक वस्तुएं भी संरक्षित हैं।

52 एकड़ में फैला है लोक भवन परिसर

लोक भवन परिसर करीब 52 एकड़ में फैला हुआ है, जबकि इससे सटा ऑड्रे हाउस लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में स्थित है। पूरे परिसर में कई आकर्षक उद्यान विकसित किए गए हैं, जहां 250 से अधिक प्रजातियों के 15 हजार से ज्यादा गुलाब लगाए गए हैं।

परिसर में नौ फव्वारे, रुद्राक्ष, कल्पतरु, पीला बांस, इलायची, संतरा, थाई अमरूद, एप्पल बेर और विभिन्न प्रजातियों के नींबू के पौधे मौजूद हैं। यहां बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, कृत्रिम झरना, आर्ट गैलरी, सोहराई पेंटिंग, हर्बल मेडिसिनल गार्डन, किचन गार्डन और गोशाला भी विकसित की गई है।

लोक भवन का बिरसा मंडप सांस्कृतिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र है, जबकि अकबर गार्डेन में गुलाबों की सैकड़ों प्रजातियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

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