रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी ने कार्रवाई तेज कर दी है। जेएसएससी की कनीय अभियंता परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में मुंबई से गिरफ्तार बिंसिस कंपनी के निदेशक अरुण कुमार को बुधवार को पांच दिनों की रिमांड पर लिया गया। अब सीआईडी उससे परीक्षा में गड़बड़ी के अलावा अन्य आरोपियों से उसके कथित संबंधों और आर्थिक लेन-देन को लेकर पूछताछ कर रही है।

जांच के दौरान बिंसिस के अलावा आईसीएन इंडिया नामक कंपनी का नाम भी सामने आया है। इस कंपनी के निदेशक मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी इन कंपनियों से जुड़े लोगों की संपत्ति और कथित वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है।

करोड़ों की संपत्ति अर्जित करने का आरोप

जांच में शामिल अधिकारियों के अनुसार, अरुण कुमार और आरके सिंह पर परीक्षा में कथित गड़बड़ी से करोड़ों रुपये अर्जित करने का आरोप है। इनसे जुड़ी संपत्तियों में बिहार में शिक्षण संस्थान, पुणे में होटल तथा दिल्ली-गुरुग्राम में जमीन और मकान शामिल होने की बात सामने आई है।

अरुण कुमार पर मुंबई स्थित अपने फिल्म निर्माण संस्थान के माध्यम से फिल्म निर्माण में निवेश करने और नोएडा में शूटिंग के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार से सब्सिडी लेने का भी आरोप है। वर्ष 2019 में उनके द्वारा ‘सेटर्स’ नामक फिल्म बनाए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।

जांच एजेंसी के अनुसार, अरुण कुमार के भाई श्रीकांत उर्फ लल्लू का नाम वर्ष 2011 में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में भी सामने आया था।

रक्षा अनुसंधान से जुड़ी परीक्षाओं में भी गड़बड़ी के आरोप

सीआईडी की जांच में अरुण कुमार पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से जुड़ी परीक्षाओं में भी कथित अनियमितता कराने के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि उसने अधिकारी महेंद्र कपूर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से सफल कराने का काम किया।

जांच के मुताबिक, सैन्य अभियंता सेवा, पुणे की वर्ष 2021-22 की परीक्षा में करीब 300 अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। वहीं दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पास वर्ष 2020 में आयोजित एक परीक्षा में करीब 20 अभ्यर्थियों को कथित तौर पर गलत तरीके से नौकरी दिलाने का आरोप है।

जेएसएससी कनीय अभियंता परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप

झारखंड में तीन जुलाई 2022 को आयोजित जेएसएससी कनीय अभियंता परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से तीन दिन पहले ही लीक होने का आरोप है। जांच के अनुसार, यह प्रश्नपत्र बिहार और झारखंड के करीब 700 अभ्यर्थियों तक पहुंचा था। इसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी।

इस मामले में अरुण कुमार के सहयोगी अभिषेक कुमार की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी, जबकि अरुण कुमार फरार बताया जा रहा था। अब मुंबई से गिरफ्तारी के बाद उसे रिमांड पर लेकर सीआईडी पूछताछ कर रही है।

इसी तरह 28 जनवरी 2024 को आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में भी अरुण कुमार और आरके सिंह पर राजस्थान के कथित परीक्षा माफिया गिरोह के साथ मिलकर बिहार के गया और औरंगाबाद में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र रटवाने का आरोप है। इस मामले के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी।

एफआरओ और एसीएफ परीक्षा में अभ्यर्थियों की सेटिंग का आरोप

टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने पूछताछ के दौरान सीआईडी को कथित तौर पर बताया कि एफआरओ और एसीएफ परीक्षा में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए पहले से नाम दिए जाते थे।

रामवीर सिंह के अनुसार, एफआरओ की प्रारंभिक परीक्षा के बाद उसे अभय तिवारी, धर्मेंद्र, आनंद और रवि की ओर से 15 अभ्यर्थियों के नाम दिए गए थे। आरोप है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं आयोग से निकालकर संबंधित लोगों तक पहुंचाई गईं और अभ्यर्थियों से अलग-अलग स्थानों पर उत्तर लिखवाए गए।

आरोप यह भी है कि चयनित अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट स्ट्रांग रूम से निकालकर खाली छोड़े गए विकल्पों को बाद में भरवाया जाता था, जिससे उनके अंक बढ़ाए जा सकें। जांच में कुछ अभ्यर्थियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके अंक कथित तौर पर इस तरीके से बढ़वाए जाने का आरोप है।

परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता पर भी गंभीर आरोप

रामवीर सिंह ने आरोप लगाया कि परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता को कथित गड़बड़ियों की जानकारी थी। उनके अनुसार, आयोग के कुछ काम लालपुर स्थित आवासीय कार्यालय से संचालित होते थे।

जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की उत्तर सीट से जुड़ी जानकारी व्हाट्सऐप के माध्यम से टीडीपीएल से जुड़े लोगों तक भेजी गई थी। इसके बाद ओएमआर शीट में कथित तौर पर बदलाव कर अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाने का आरोप है।

हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है और संबंधित आरोपों पर सभी पक्षों का अंतिम कानूनी पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

डॉ. जमाल अहमद ने आरोपों को बताया तथ्य से परे

जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच के सिलसिले में आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. जमाल अहमद बुधवार को सीआईडी कार्यालय पहुंचे। एजेंसी ने उनसे पूछताछ कर उनका बयान दर्ज किया।

डॉ. जमाल अहमद ने किसी भी गड़बड़ी में अपनी भूमिका से इनकार किया। उन्होंने कहा कि आयोग की बैठकों में जिन मुद्दों पर उन्हें असहमति होती थी, वे अपनी बात मजबूती से रखते थे। उन्होंने टीडीपीएल के चयन में किसी तरह की अनियमितता या कंपनी के माध्यम से गलत तरीके से नियुक्ति की जानकारी होने से भी इनकार किया।

उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को तथ्य से परे बताया। इससे पहले सीआईडी जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ कर चुकी है। अब पूर्व सदस्य डॉ. अनिमा हांसदा से भी पूछताछ की तैयारी है।

मुख्य सचिव कार्यालय के कर्मी धर्मेंद्र से दोबारा पूछताछ

सीआईडी ने मुख्य सचिव कार्यालय से जुड़े कर्मी धर्मेंद्र से भी दोबारा पूछताछ शुरू कर दी है। रिमांड अवधि बढ़ने के बाद बुधवार को उससे अन्य आरोपियों के बयानों के आधार पर कई सवाल पूछे गए।

जांच एजेंसी ने उससे पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते से संबंध, टीडीपीएल और बिंसिस कंपनी से संपर्क तथा कथित पैसों के लेन-देन के बारे में जानकारी मांगी। पूछताछ में धर्मेंद्र ने बताया कि एल. खियांग्ते के मुख्य सचिव रहने के समय से ही वह उनके संपर्क में था।

अरुण कुमार से इन मामलों में भी पूछताछ

बिंसिस के निदेशक अरुण कुमार को जेएसएससी कनीय अभियंता परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में पांच दिनों की रिमांड पर लिया गया है। सीआईडी उससे अभय तिवारी, धर्मेंद्र और जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से कथित संबंधों को लेकर भी पूछताछ कर रही है।

कनीय अभियंता परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में नामकुम थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जांच के लिए रांची पुलिस ने विशेष जांच दल का गठन किया था। अब अरुण कुमार की गिरफ्तारी के बाद जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े अलग-अलग मामलों में जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version