लातेहार: सावन माह की शुरुआत के साथ ही महुआडांड़ अनुमंडल पूरी तरह शिवमय हो गया है। क्षेत्र के शिव मंदिरों, शिवालयों और घर-घर में भगवान भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह से ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और बेलपत्र, धतूरा, दूध व गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
सावन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। विष की तपिश शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
सावन के सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने की कामना से और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं।
महुआडांड़ के शिवालयों में उमड़ रही भक्तों की भीड़
महुआडांड़ के प्रमुख शिव मंदिरों और अन्य शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। युवा और महिलाएं हरे वस्त्र धारण कर भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। वहीं, लोध फॉल से सरनाधाम तक प्रस्तावित कांवड़ यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
मुख्य पुजारी ने बताया सावन का महत्व
श्रीकोट के मुख्य पुजारी विद्याकांत तिवारी महाराज ने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस पवित्र मास में श्रद्धापूर्वक शिव आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सावन सोमवार को रुद्राभिषेक करने से घर में सुख-शांति आती है और रोग-दोष दूर होते हैं।
उन्होंने कहा कि महुआडांड़ की धरती आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। लोध फॉल जैसे प्राकृतिक और धार्मिक महत्व के स्थल इस क्षेत्र की पहचान हैं। जल, जंगल और जमीन की पूजा यहां की संस्कृति का हिस्सा है और सावन का पर्व लोगों को प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश भी देता है।
प्रकृति और सामाजिक समरसता का भी संदेश देता है सावन
सावन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, हरियाली और सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक है। इस महीने ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अच्छी वर्षा और बेहतर फसल की कामना के लिए भगवान शिव की पूजा करते हैं। वहीं महिलाएं हरी चूड़ियां, मेहंदी और झूले की परंपरा के साथ इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाती हैं। महुआडांड़ क्षेत्र के लोग पूरे सावन माह में भक्ति, शांति और समृद्धि की कामना के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना कर रहे हैं।
