मुंबई: फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा ने NEET परीक्षा को लेकर जारी बहस के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मेडिकल प्रवेश परीक्षा नहीं, बल्कि तेजी से विकसित हो रही AI तकनीक है, जो आने वाले वर्षों में शिक्षा और रोजगार की पूरी व्यवस्था बदल सकती है।

NEET विवाद से बड़ी चुनौती है AI

सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने विचारों में राम गोपाल वर्मा ने कहा कि NEET पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और छात्रों की आत्महत्या जैसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती हैं। हालांकि, उनके अनुसार AI का प्रभाव इन सभी समस्याओं से कहीं अधिक व्यापक और दीर्घकालिक होगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली उस दौर के लिए बनाई गई थी, जब जानकारी सीमित थी और करियर के रास्ते अपेक्षाकृत तय होते थे। आज तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि यह व्यवस्था भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नहीं रह गई है।

बदलती दुनिया के लिए नई सोच जरूरी

राम गोपाल वर्मा ने कहा कि आज यह तय करना मुश्किल है कि बच्चों को अगले 10 से 20 वर्षों की दुनिया के लिए क्या पढ़ाया जाए। उनके मुताबिक, ज्ञान और तकनीकी कौशल तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए केवल डिग्री और अच्छे अंक भविष्य की सफलता की गारंटी नहीं रह गए हैं।

उन्होंने कहा कि आज चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही और गलत जानकारी के बीच अंतर करने की है। AI बड़ी मात्रा में उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण इंसानों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से कर सकता है।

‘मेहनत से सुरक्षित भविष्य’ की धारणा बदल रही

वर्मा का कहना है कि AI ने उस पारंपरिक सोच को बदल दिया है, जिसमें माना जाता था कि अच्छी पढ़ाई और कड़ी मेहनत से पूरी जिंदगी सुरक्षित हो जाती है। अब सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कोई व्यक्ति बदलती तकनीक के साथ खुद को कितनी तेजी से ढालता है और नई चीजें कितनी जल्दी सीखता है।

इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ और MBA छात्रों के लिए जताई चिंता

राम गोपाल वर्मा ने चेतावनी दी कि इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, MBA, आर्किटेक्चर, डिजाइन और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले छात्रों को भविष्य में AI से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इसे “AI स्लॉटरहाउस” करार देते हुए कहा कि जब तक छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे, तब तक कई डिग्रियों का महत्व कम हो सकता है।

उनका मानना है कि भविष्य में AI की मदद से एक व्यक्ति बीमारी की पहचान, कानूनी दस्तावेज तैयार करने, कोडिंग, डेटा विश्लेषण, सिस्टम डिजाइन और ऑडिट जैसे कई कार्य अकेले कर सकेगा, जिनके लिए आज विशेषज्ञों की अलग-अलग टीम की जरूरत पड़ती है।

एंट्री-लेवल नौकरियों पर भी जताई चिंता

राम गोपाल वर्मा ने कहा कि दुनिया के कई तकनीकी विशेषज्ञ पहले ही यह आशंका जता चुके हैं कि AI के कारण बड़ी संख्या में एंट्री-लेवल नौकरियां समाप्त हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि यदि छात्रों को पढ़ाई के दौरान AI के साथ काम करना नहीं सिखाया जाता, तो उन्हें ऐसी नौकरियों के लिए तैयार किया जा रहा है, जो भविष्य में शायद अस्तित्व में ही न रहें। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों के भविष्य का मूल्यांकन केवल रैंक और डिग्री के आधार पर न करें तथा शिक्षा व्यवस्था को समय के अनुरूप बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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