लोहरदगा: रांची स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित आरोग्य फाउंडेशन ऑफ इंडिया के दो दिवसीय अखिल भारतीय संभाग सम्मेलन (राष्ट्रीय समागम) में लोहरदगा जिले को उत्कृष्ट कार्यों के लिए विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना तथा आरोग्य सेवकों और सेविकाओं के नेटवर्क को सशक्त बनाना था।
22 राज्यों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन में देश के 22 राज्यों से फाउंडेशन के प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम को भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रीय सलाहकार एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक वार्ष्णेय ने मुख्य वक्ता एवं मार्गदर्शक के रूप में संबोधित किया। इस दौरान विभिन्न राज्यों में किए जा रहे स्वास्थ्य सेवा कार्यों की समीक्षा की गई।
लोहरदगा की नई समिति के कार्यों की हुई सराहना
सम्मेलन में लोहरदगा जिले की नई समिति के कार्यों की विशेष प्रशंसा की गई। फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष डॉ. कुमुद अग्रवाल, उपाध्यक्ष संजय चौधरी, जिला सचिव सुनील अग्रवाल तथा संरक्षक नवल अग्रवाल के नेतृत्व में किए जा रहे सामाजिक और स्वास्थ्य सेवा कार्यों को मंच से सराहा गया। पदाधिकारियों को सम्मानित भी किया गया।
सम्मेलन में प्रत्येक रविवार आयोजित होने वाले निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, भंडारा और चट्टी क्षेत्रों में संगठन की सक्रियता तथा करीब 60 गांवों की सेविकाओं के सहयोग की भी विशेष रूप से सराहना की गई।
लोहरदगा में लगेगा मेगा आई चेकअप कैंप
कार्यक्रम के दौरान फाउंडेशन के संयोजक जय प्रकाश शर्मा ने केंद्रीय समिति से नेत्र जांच वाहन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को कुछ दिनों के लिए लोहरदगा भेजने का आग्रह किया। केंद्रीय समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसके तहत जल्द ही जिले के विभिन्न क्षेत्रों में मेगा आई चेकअप कैंप आयोजित किया जाएगा।
शिविर में नेत्र रोग विशेषज्ञ मरीजों की जांच करेंगे। जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए जाएंगे और मोतियाबिंद के मरीजों का मुफ्त ऑपरेशन भी कराया जाएगा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ समापन
सम्मेलन में केंद्रीय मार्गदर्शक सर्जन डॉ. मुकुल भाटिया, डॉ. राम मोहन, श्रीमती प्रभा भट्ट, डॉ. एम.एस. भट्ट, केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य शिव शंकर साबू, नीलम रानी, राजनाथ समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी और चिकित्सक मौजूद रहे। समापन अवसर पर विभिन्न राज्यों के लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुतियां भी दी गईं।

