रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। राज्य के पांच जिलों में 18 ठिकानों पर छापेमारी के बाद मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर सीआईडी ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में आदित्य पांडेय, लालू यादव और प्रदीप यादव शामिल हैं।
कोचिंग संस्थानों और कंपनी के बीच साठगांठ की जांच
सीआईडी की जांच में यह सामने आया है कि कुछ कोचिंग संस्थानों और टीडीपीएल कंपनी के अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर किस तरह लेनदेन किया गया और पूरे नेटवर्क का संचालन कैसे होता था।
इसी मामले में टीडीपीएल कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और जेपीएससी के प्रोग्रामर उस्मान से भी पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारी उनके बयानों और जब्त दस्तावेजों का मिलान कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रहे हैं।
नौकरी दिलाने के नाम पर लिए जाते थे चेक और दस्तावेज
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अभ्यर्थियों से सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर अग्रिम सुरक्षा के तौर पर ब्लैंक चेक, बैंक से जुड़े दस्तावेज और जमीन के कागजात लिए जाते थे, ताकि चयन होने के बाद भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
सीआईडी अधिकारियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसमें कई स्तरों पर लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिले अहम साक्ष्य
इससे पहले सीआईडी ने उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से एडमिट कार्ड, ओएमआर शीट, ब्लैंक चेक और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए थे।
अब जांच एजेंसी जब्त किए गए दस्तावेजों और ब्लैंक चेक का मिलान कर रही है, ताकि कथित भर्ती घोटाले से जुड़े पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
