रांची: सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी छात्र आंदोलन अब विरोध के रचनात्मक और व्यंग्यात्मक तरीकों के लिए भी चर्चा में है। आंदोलनकारी छात्र गुस्से और आक्रोश को हिंसा या अपशब्दों के बजाय पोस्टर, प्रतीकात्मक प्रदर्शन और साहित्यिक पंक्तियों के जरिए सामने रख रहे हैं।
प्रदर्शन स्थल पर कहीं सरकारी नौकरियों का काल्पनिक ‘रेट कार्ड’ लगाया गया है, तो कहीं व्यंग्यात्मक पोस्टरों के जरिए व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छात्रों के बीच रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कृति ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियां भी सुनाई दे रही हैं।
‘नौकरी बिक्री केंद्र’ बनाकर जताया विरोध
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने व्यंग्यात्मक तरीके से ‘नौकरी बिक्री केंद्र’ तैयार किया है। इसमें अलग-अलग सरकारी पदों के लिए काल्पनिक कीमतें लिखी गई हैं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, सहायक शिक्षक के पद की कीमत 15 लाख रुपये, पुलिस उपाधीक्षक की 1.2 करोड़ रुपये, प्रखंड विकास पदाधिकारी की 90 लाख रुपये और अंचल पदाधिकारी की एक करोड़ रुपये बताई गई है।
वहीं, सरकारी नौकरियों के इस काल्पनिक ‘रेट कार्ड’ के पास 500 रुपये के नोट जैसी दिखने वाली गड्डियों से भरा एक तराजू भी रखा गया है। छात्रों का कहना है कि इन प्रतीकों के जरिए वे भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
‘मुख्यमंत्री सीट बेचो योजना’ से सरकार पर तंज
आंदोलन स्थल पर लगाए गए कुछ पोस्टर भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीर के साथ काल्पनिक ‘मुख्यमंत्री सीट बेचो योजना’ का उल्लेख किया गया है। पोस्टर पर व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा गया है- ‘पेमेंट करो आराम से, नौकरी पाओ सम्मान से।’
छात्रों ने इन पोस्टरों के माध्यम से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को अलग अंदाज में सामने रखा है।
‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों से अपने संघर्ष को जोड़ रहे छात्र
प्रदर्शन स्थल पर कई छात्र रामधारी सिंह दिनकर की ‘रश्मिरथी’ के ‘कृष्ण की चेतावनी’ खंड की पंक्तियां सुनाते नजर आ रहे हैं। विशेष रूप से,
‘वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी, पत्थर, पांडव आए कुछ और निखर।’
छात्र इन पंक्तियों के माध्यम से अपने लंबे संघर्ष और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान झेली जा रही परेशानियों की तुलना पांडवों के संघर्ष से कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद भी यदि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हों, तो युवाओं की निराशा स्वाभाविक है।
टी-शर्ट पर लिखा- ‘व्यवस्था ने हमें निराश किया है’
प्रदर्शन में शामिल छात्र विवेक ने अपनी सफेद टी-शर्ट पर स्याही से ‘व्यवस्था ने हमें निराश किया है’ लिखकर विरोध दर्ज कराया है। आंदोलन स्थल पर इस तरह के कई प्रतीकात्मक संदेश देखने को मिल रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही की मांग को व्यापक स्तर पर सामने लाना है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी आंदोलन में छात्र अलग-अलग रचनात्मक माध्यमों से अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे हैं।

