रांची: झारखंड में फिल्म एवं टेलीविजन शिक्षा को नई दिशा देने की पहल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई), कोलकाता के बीच हुए समझौते के बाद अब झारखंड फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (जेएफटीआई) की स्थापना की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रारंभिक चरण में यह संस्थान रांची स्थित सूचना भवन से संचालित होगा।

सूचना भवन का किया गया निरीक्षण

गुरुवार को एसआरएफटीआई, कोलकाता के कुलपति समीरन दत्ता अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ सूचना भवन पहुंचे। इस दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर संस्थान की स्थापना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। साथ ही सूचना भवन में उपलब्ध स्थान और संसाधनों का निरीक्षण कर वहां प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं का आकलन किया गया।

शुरुआती चरण में शुरू होंगे अल्पकालिक कोर्स

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक आनंद ने बताया कि जेएफटीआई के शुरुआती चरण में विद्यार्थियों और कामकाजी युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इनमें पार्ट टाइम, फुल टाइम और ईवनिंग क्लास की सुविधा उपलब्ध होगी। कोर्स की अवधि एक, दो, तीन और छह महीने तक रखी जाएगी।

उन्होंने बताया कि विभाग के उपलब्ध संसाधनों और एसआरएफटीआई के तकनीकी सहयोग से जल्द ही शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

फिल्म निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में मिलेगा प्रशिक्षण

एसआरएफटीआई के कुलपति समीरन दत्ता ने कहा कि झारखंड फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट राज्य के युवाओं को विश्वस्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगा। संस्थान में साउंड डिजाइनिंग, एडिटिंग, एनिमेशन, स्क्रिप्ट एवं स्क्रीनप्ले लेखन, सिनेमैटोग्राफी, निर्देशन और फिल्म प्रोडक्शन जैसे विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि एसआरएफटीआई संस्थान के ब्लूप्रिंट, कक्षा डिजाइन, तकनीकी ढांचे और अतिथि शिक्षकों के प्रशिक्षण में हरसंभव सहयोग करेगा।

मीडिया कर्मियों के लिए भी होगा विशेष प्रशिक्षण

समीरन दत्ता ने सुझाव दिया कि संस्थान पूरी तरह क्रियाशील होने के बाद राज्य के मीडिया कर्मियों के लिए भी अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं, ताकि वे आधुनिक फिल्म, टेलीविजन और मीडिया तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि स्वस्थ फिल्म संस्कृति विकसित करने के लिए शुरुआत फिल्म एप्रिसिएशन कोर्स से की जा सकती है।

बैठक में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक शाहिद आलम, राशिद अख्तर, बीरू कुशवाहा, सुनीता धान, अभय कुमार तथा एसआरएफटीआई के एसोसिएट प्रोफेसर नीलांजन बनर्जी और प्रोफेसर इंद्रनील मुखर्जी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


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