रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। रांची में धरना दे रहे अभ्यर्थियों से संवाद स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्र प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात का निमंत्रण दिया। सरकार का उद्देश्य बातचीत के माध्यम से लंबे समय से जारी आंदोलन का शांतिपूर्ण समाधान निकालना है।
छात्रों को मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रस्ताव
सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) कुमार रजत और अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) धनंजय कुमार धरना स्थल पहुंचे और अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री आवास पर पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक का प्रस्ताव दिया। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों ने प्रस्ताव पर तत्काल सहमति देने के बजाय अपने साथियों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए लगभग दो घंटे का समय मांगा।
छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक केवल छात्र प्रतिनिधियों और सरकार के बीच होनी चाहिए, ताकि उनकी मांगों पर बिना किसी व्यवधान के विस्तार से चर्चा की जा सके। प्रशासन छात्रों के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने निष्पक्ष कार्रवाई का दिया भरोसा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उनकी सरकार छात्रों की सभी चिंताओं को गंभीरता से सुनने और उनका समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा जांच एजेंसियां लगातार छापेमारी कर पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के दरवाजे सभी नागरिकों के लिए खुले हैं और जो भी अपनी मांगें रखना चाहते हैं, उनका स्वागत है।
JMM ने भी जताया समर्थन
सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भी आंदोलनरत छात्रों के प्रति समर्थन जताया है। पार्टी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि राज्य सरकार जल्द ही एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर सकती है, जो भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करेगी। साथ ही यह भी कहा गया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्या हैं छात्रों की मांगें?
छात्रों का आंदोलन 5 जुलाई को 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद शुरू हुआ था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें हैं—
- 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
- टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित सभी परीक्षाओं की व्यापक जांच कराई जाए।
- भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
- कथित गड़बड़ियों में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रस्तावित वार्ता को इस पूरे विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
