गुमला: कृषि विज्ञान केंद्र गुमला में 18वीं वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक गंभीर और वैज्ञानिक वातावरण में संपन्न हुई। विकास भारती बिशुनपुर द्वारा संचालित इस संस्थान में आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करना और वर्ष 2026-27 के लिए व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार करना था।
पद्मश्री अशोक भगत रहे मुख्य अतिथि

बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री अशोक भगत उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ अवनी कुमार सिंह, डॉ निरंजन लाल, इंजीनियर एस के पाण्डेय और डॉ संजय पाण्डेय समेत कई विशेषज्ञ शामिल हुए।
इसके अलावा जिला कृषि पदाधिकारी, पशुपालन, मत्स्य, भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारी और प्रगतिशील किसान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
वर्ष 2025-26 के कार्यों की हुई समीक्षा
बैठक के पहले चरण में वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। इसमें बताया गया कि किसानों के बीच उन्नत कृषि तकनीकों का प्रसार, खेत स्तर पर प्रदर्शन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कृषि आधारित आजीविका बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई गईं।
फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया गया।
जलवायु परिवर्तन और जैविक खेती पर जोर
प्रस्तुतीकरण में यह भी बताया गया कि बदलती जलवायु को देखते हुए कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली फसल किस्मों, सूखा सहन करने वाली प्रजातियों और जैविक खेती के तरीकों को बढ़ावा दिया गया।
मृदा स्वास्थ्य सुधार, संतुलित उर्वरक उपयोग और जल संरक्षण के उपायों को किसानों तक पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
समेकित खेती प्रणाली पर विशेष बल
मुख्य अतिथि अशोक भगत ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों को केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और अन्य गतिविधियों को जोड़कर समेकित खेती प्रणाली अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी, जोखिम कम होगा और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी।
वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना तैयार
बैठक के दूसरे चरण में वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना पर चर्चा की गई। इसमें किसानों के लिए अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम, नई फसल किस्मों का प्रदर्शन, महिला और युवा किसानों के लिए विशेष कार्यक्रम तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय शामिल किए गए।
इसके अलावा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, प्रसंस्करण, भंडारण और नियमित मार्गदर्शन व्यवस्था को मजबूत करने का भी प्रस्ताव रखा गया।
किसानों ने साझा किए अनुभव
प्रगतिशील किसानों ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा दी गई तकनीकों को अपनाने से उनकी उत्पादन क्षमता और आय में वृद्धि हुई है। उन्होंने प्रशिक्षण को और व्यवहारिक बनाने तथा निरंतर संपर्क बनाए रखने का सुझाव दिया।
यह बैठक इस निष्कर्ष के साथ संपन्न हुई कि वैज्ञानिक सोच, समन्वित प्रयास और किसानों की सक्रिय भागीदारी से गुमला जिले में कृषि को अधिक लाभकारी, सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है।