रांची: झारखंड भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य में कथित हजारों करोड़ रुपये के ट्रेजरी घोटाले को लेकर हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों के लगभग 10,000 करोड़ रुपये के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले में अपने चहेते वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

एसआईटी की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा शुरू से ही इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करती रही है। उनका आरोप है कि जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया, जिनके पुलिस अधीक्षक रहते संबंधित जिलों में ट्रेजरी घोटाले हुए थे। उन्होंने कहा कि एसआईटी के दो सदस्य हजारीबाग और बोकारो के एसपी रह चुके हैं, जहां इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

‘छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई, बड़े अधिकारियों को बचाया गया’

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि चारा घोटाला मामलों में सीबीआई अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों की भूमिका को स्वीकार करते हुए उन्हें सजा सुनाई थी, जिसे बाद में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था।

वित्त नियमावली का दिया हवाला

प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड वित्त नियमावली के विभिन्न प्रावधानों तथा झारखंड कोषागार संहिता-2016 में सरकारी धन की निकासी के संबंध में डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। उनके अनुसार संबंधित अधिकारियों का दायित्व होता है कि वे बिल, दस्तावेज और हस्ताक्षरों की वैधता की जांच करें तथा किसी भी प्रकार की आशंका होने पर भुगतान रोककर जांच सुनिश्चित करें।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी, जबकि चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए। भाजपा का आरोप है कि जिन मामलों को दबाना होता है, उन्हें सीआईडी के हवाले कर दिया जाता है।

‘पीएजी को अब तक नहीं सौंपे गए दस्तावेज’

भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि राज्य सरकार ने स्पेशल ऑडिट के लिए प्रधान महालेखाकार (पीएजी) से अनुरोध किया था। इसके बाद 11 मई 2026 को प्रधान महालेखाकार ने गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव को 87 प्रकार के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी ये दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्पाद सचिव की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने अब तक अपनी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि चारा घोटाले के मामलों का उल्लेख करते हुए इतिहास से सबक लेने की जरूरत है और ट्रेजरी घोटाले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रेसवार्ता में भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अजय राय भी मौजूद रहे।

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