रांची: झारखंड सरकार की विभिन्न योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा और राज्य के बजट खर्च से जुड़ी कई कमियों को उजागर किया गया है।
झारखंड की प्रधान महालेखाकार इंदु अग्रवाल ने मंगलवार को विधानसभा में रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद इसकी प्रमुख जानकारियां साझा कीं।
प्रधानमंत्री आवास योजना में 6.32 लाख पात्र परिवार छूटे
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए राज्य को उपलब्ध कराई गई कुल 20,199.98 करोड़ रुपये की राशि में से केवल 14,113.07 करोड़ रुपये ही खर्च किए जा सके। यानी उपलब्ध राशि का करीब 70 प्रतिशत ही उपयोग हुआ।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य में करीब 6.32 लाख पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए। वहीं करीब 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम योजना की सूची में शामिल किए गए थे। हालांकि, बाद में ग्राम सभाओं के माध्यम से ऐसे नामों को सूची से हटाया गया।
मनरेगा की 73 प्रतिशत योजनाएं अधूरी
मनरेगा के क्रियान्वयन में भी रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर सामने रखी है। वर्ष 2019 से 2024 के दौरान स्वीकृत करीब एक करोड़ मनरेगा योजनाओं में से केवल 27.96 लाख योजनाएं पूरी हो सकीं। यानी करीब 27 प्रतिशत योजनाएं ही पूरी हुईं, जबकि लगभग 73 प्रतिशत योजनाएं अधूरी रह गईं।
रिपोर्ट के अनुसार, अकुशल मजदूरों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान मार्च 2025 तक लंबित था।
मजदूरी की राशि से वाहनों की मरम्मत का आरोप
सीएजी रिपोर्ट में मनरेगा की राशि के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मजदूरों की मजदूरी के लिए निर्धारित राशि में से 32.62 लाख रुपये वाहनों की मरम्मत पर खर्च किए गए।
गिरिडीह, गुमला और पाकुड़ जिलों में मजदूरों की राशि से वाहनों के टायर और बैटरी बदलने के मामले भी सामने आए हैं।
सिर्फ 2 से 4 प्रतिशत परिवारों को मिला 100 दिन का पूरा रोजगार
मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में केवल 2 से 4 प्रतिशत परिवारों को ही 100 दिनों का पूरा रोजगार मिल सका।
इस आंकड़े को ग्रामीण रोजगार योजना के क्रियान्वयन के लिहाज से महत्वपूर्ण कमी माना गया है।
बजट का 20.61 प्रतिशत हिस्सा खर्च नहीं हो सका
वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सीएजी रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा विधानसभा में रखी गई वित्तीय वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार निर्धारित मूल बजट प्रावधान की पूरी राशि भी खर्च नहीं कर सकी। इसके बावजूद 5,407 करोड़ रुपये के अनुपूरक प्रावधान किए गए।
वर्ष 2024-25 में राज्य का कुल बजट 1,50,938.84 करोड़ रुपये था। इसमें से 31,110 करोड़ रुपये, यानी करीब 20.61 प्रतिशत राशि, खर्च नहीं हो सकी।
सीएजी की रिपोर्ट में सामने आए ये आंकड़े राज्य में योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभुकों के चयन, मजदूरी भुगतान और बजट प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं।

