रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के लॉ अफसरों की नियुक्ति और भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए नई नियमावली और शुल्क संरचना लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत महाधिवक्ता को अधिकतम 2.75 लाख रुपये प्रतिमाह तक ही भुगतान किया जाएगा। साथ ही सरकारी वकीलों की नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं।
जूनियर लॉ एसोसिएट की व्यवस्था खत्म
अब तक महाधिवक्ता की अनुशंसा पर उनके कार्यालय में जूनियर लॉ एसोसिएट के रूप में अधिवक्ताओं की नियुक्ति होती थी। वर्तमान में ऐसे करीब 150 जूनियर लॉ एसोसिएट कार्यरत हैं। नई नियमावली के लागू होने के बाद यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर महाधिवक्ता कार्यालय में अब कुल 63 पदों पर नियुक्ति की व्यवस्था की गई है।
सरकारी वकीलों की संख्या बढ़ाई गई
नई नीति के तहत सरकारी वकीलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। पहले जहां सरकारी वकीलों के केवल 6 पद थे, वहीं अब इन्हें बढ़ाकर 44 पद कर दिया गया है। इसके अलावा वरीय अपर महाधिवक्ता के पदों की संख्या भी एक से बढ़ाकर दो कर दी गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक नई नियमावली ‘द झारखंड लॉ अफसर इंगेजमेंट रूल्स-2026’ के तहत 44 नए सरकारी वकीलों की नियुक्ति पूरी नहीं हो जाती, तब तक पुरानी व्यवस्था अस्थायी रूप से जारी रहेगी। इस संबंध में राज्य सरकार ने 24 जुलाई को आदेश जारी किया है।
नई संरचना में इन पदों का होगा प्रावधान
नई व्यवस्था के तहत महाधिवक्ता कार्यालय में निम्नलिखित पद होंगे:
- महाधिवक्ता – 1
- वरीय अपर महाधिवक्ता – 2
- अपर महाधिवक्ता – 1
- राजकीय अधिवक्ता – 1
- सरकारी वकील – 44
- लॉ रिसर्च ऑफिसर – 15
कुल मिलाकर अब 63 पदों की नई संरचना लागू की गई है।
पूर्व महाधिवक्ता ने जताई चिंता
झारखंड के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने नई नीति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं की संख्या कम होने से सरकारी मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है और उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या बढ़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश मामले सरकार से जुड़े होते हैं। ऐसे में जूनियर लॉ एसोसिएट की व्यवस्था समाप्त होने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ताओं पर कार्यभार बढ़ जाएगा। इसके चलते जेपीएससी, जेएसएससी समेत अन्य सरकारी संस्थानों में निजी अधिवक्ताओं की नियुक्ति का चलन भी बढ़ सकता है।

