नई दिल्ली: 25 जून 1975 भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और विवादास्पद तारीखों में से एक मानी जाती है। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर देश में आंतरिक आपातकाल लागू किया गया था। इसके बाद करीब 21 महीने तक देश ऐसे दौर से गुजरा, जिसे लोकतंत्र की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है।

आपातकाल के दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं पर कई प्रतिबंध लगाए गए, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई और बड़ी संख्या में विपक्षी नेताओं व राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। 51 वर्ष बाद भी यह विषय राजनीतिक और संवैधानिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

क्या होता है आपातकाल?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 352 केंद्र सरकार को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करने का अधिकार देता है। वर्ष 1975 में “आंतरिक अशांति” को आधार बनाकर आपातकाल लागू किया गया था। बाद में 44वें संविधान संशोधन के जरिए इस प्रावधान में बदलाव करते हुए “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” शब्द जोड़ा गया, ताकि भविष्य में इस व्यवस्था के दुरुपयोग की संभावना कम हो सके।

आपातकाल लागू होने के बाद केंद्र सरकार को व्यापक अधिकार प्राप्त हो जाते हैं और कुछ परिस्थितियों में नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

आपातकाल के दौरान क्या-क्या हुआ?

1970 के दशक के मध्य में देश आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा था। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और विभिन्न राज्यों में चल रहे सरकार विरोधी आंदोलनों के बीच आपातकाल लागू किया गया।

इस अवधि के दौरान कई बड़े घटनाक्रम सामने आए—

बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां

लोकनायक जयप्रकाश नारायण, पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सहित हजारों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

प्रेस पर सेंसरशिप

मीडिया संस्थानों पर कड़ी निगरानी रखी गई। कई समाचार पत्रों और प्रकाशनों को सरकारी अनुमति के बाद ही समाचार प्रकाशित करने की अनुमति थी।

मौलिक अधिकारों पर असर

आपातकाल के दौरान नागरिकों के कुछ मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया था, जिससे सरकारी फैसलों के खिलाफ कानूनी चुनौती देना कठिन हो गया था।

विवादित अभियान

इस दौरान परिवार नियोजन अभियान और झुग्गी-झोपड़ी हटाने जैसी नीतियों को लेकर भी व्यापक विवाद हुए। इन अभियानों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे थे।

आपातकाल लागू करने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार आपातकाल लागू होने के पीछे कई राजनीतिक और प्रशासनिक कारण थे।

  • 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के लोकसभा चुनाव को निरस्त कर दिया था।
  • विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया था।
  • जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन लगातार मजबूत हो रहा था।
  • देश आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा था।

1977 में खत्म हुआ आपातकाल

21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त कर दिया गया। इसके बाद हुए आम चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में देश की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार सत्ता में आई।

क्या आज 1975 जैसी स्थिति संभव है?

संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान भारत और 1975 के भारत में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं। आज संविधान के प्रावधानों में संशोधन हो चुके हैं, न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है और चुनावी प्रक्रिया नियमित रूप से संचालित होती है।

हालांकि सरकार की नीतियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर समय-समय पर बहस होती रहती है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था संवैधानिक ढांचे के भीतर संचालित हो रही है। संसद, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं।

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