रांची : चर्चित रिम्स जमीन फर्जीवाड़ा मामले में न्यायिक हिरासत में बंद दो आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में 6 जून को आदेश सुनाया जाएगा।
जिन आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, उनमें राजकिशोर बड़ाइक और कार्तिक बड़ाइक शामिल हैं। दोनों के खिलाफ रिम्स की अधिग्रहित भूमि से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में जांच चल रही है।
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब झारखंड हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने 5 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों के सामने आने के बाद एसीबी ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच शुरू की।
चार आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
एसीबी ने 7 अप्रैल 2026 को कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों में राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, राजेश झा और चेतन कुमार शामिल हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सभी आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से सरकारी भूमि को निजी संपत्ति के रूप में प्रस्तुत करने की साजिश रची थी।
फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन पर दावा करने का आरोप
जांच के अनुसार आरोपियों ने रिम्स की अधिग्रहित जमीन को निजी भूमि साबित करने के लिए कथित तौर पर फर्जी वंशावली और अन्य दस्तावेज तैयार किए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर मालिकाना हक जताने की कोशिश की गई।
एसीबी का दावा है कि यह एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जिसके माध्यम से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया गया।
9.65 एकड़ अधिग्रहित जमीन से जुड़ा है मामला
पूरा मामला वर्ष 1964-65 में रिम्स के लिए अधिग्रहित करीब 9.65 एकड़ जमीन से संबंधित है। आरोप है कि इस जमीन पर अवैध कब्जा कर अपार्टमेंट, दुकानें और अन्य निर्माण कार्य किए गए।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। वहीं दो आरोपियों की जमानत याचिका पर अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा है। 6 जून को आने वाला आदेश इस बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

