रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास ने कांग्रेस, राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे देश में वंशवाद, जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा को लेकर आंदोलन करने वाले नेता झारखंड के युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर पूरी तरह चुप हैं।
रघुवर दास ने दावा किया कि झारखंड में एक साथ 10 प्रतियोगी परीक्षाएं स्थगित होने का रिकॉर्ड बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य आज पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों में देश के सबसे बदनाम राज्यों में शामिल हो गया है, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
JSSC और JPSC में अनियमितताओं का लगाया आरोप
पूर्व मुख्यमंत्री ने हालिया प्रतियोगी परीक्षाओं का हवाला देते हुए कहा कि संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 100 में से 40 प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि JSSC और JPSC जैसी संस्थाओं में अनियमितताओं के स्पष्ट संकेत मिले हैं, लेकिन राज्य सरकार परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों को बचाने का काम कर रही है।
उन्होंने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि जल्दबाजी में आयोजित परीक्षा के दौरान 12 अभ्यर्थियों की मौत हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2025 में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी एजेंसी TDPL को भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी किसके संरक्षण में दी गई।
JPSC परीक्षा की CBI जांच की मांग
रघुवर दास ने कहा कि नीट मामले में केंद्र सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए CBI जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी और परीक्षा दोबारा कराने जैसे कदम उठाए। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार राज्य के युवाओं के साथ हुए कथित अन्याय पर मौन है। उन्होंने JPSC परीक्षा की भी CBI जांच कराने की मांग दोहराई।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और वामपंथी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि उनमें नैतिकता बची है तो उन्हें झारखंड सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा दिलाने की मांग उठाने की अपील की।
रघुवर दास ने कहा कि केंद्र सरकार हमेशा संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने में विश्वास रखती है और विपक्ष को भी देशहित में रचनात्मक बहस का हिस्सा बनना चाहिए।

