रांची: हूल दिवस के अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने मंगलवार को मोरहाबादी स्थित वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने हूल विद्रोह के महानायकों के संघर्ष और बलिदान को नमन करते हुए इसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
संथाल हूल स्वाभिमान और जनप्रतिरोध का प्रतीक
अर्जुन मुंडा ने कहा कि संथाल हूल केवल एक विद्रोह नहीं था, बल्कि यह अन्याय, शोषण और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध स्वाभिमान, साहस तथा जनप्रतिरोध का ऐतिहासिक उद्घोष था। उन्होंने कहा कि हूल आंदोलन ने देश के स्वतंत्रता संग्राम को नई चेतना और नई दिशा प्रदान की।
वीर सिदो-कान्हू का बलिदान सदैव रहेगा प्रेरणास्रोत
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वीर सिदो-कान्हू के अद्वितीय नेतृत्व और उनके अमर बलिदान ने स्वतंत्रता की लड़ाई को नई ऊर्जा दी। उनका त्याग, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू का जीवन भारतीय जनजातीय समाज की गौरवशाली विरासत और राष्ट्रसेवा के प्रति अटूट संकल्प का प्रतीक है। उनके आदर्श समाज को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और राष्ट्रहित में कार्य करने की निरंतर प्रेरणा देते रहेंगे।
