रांची: झारखंड की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत के समक्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां हुईं, जिसके माध्यम से कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को बीडीओ, सीओ, डीएसपी, वाणिज्यकर अधिकारी समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कराया गया।
सीबीआई ने करीब डेढ़ वर्ष पहले अदालत में अपनी जांच रिपोर्ट दाखिल करते हुए बताया कि परीक्षा में अंक बढ़ाने, उत्तर पुस्तिकाओं में काट-छांट, ओएमआर शीट में फर्जीवाड़ा और नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी ने इस मामले में 60 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, कूटरचना और भ्रष्टाचार के आरोपों में मुकदमा चलाने की सिफारिश की है। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय अदालत के अधीन है।
फॉरेंसिक जांच में अंकों की हेराफेरी की पुष्टि
सीबीआई के अनुसार, जांच के दौरान संदिग्ध उत्तर पुस्तिकाओं की गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला से वैज्ञानिक जांच कराई गई। रिपोर्ट में कई उत्तर पुस्तिकाओं में अंकों में बदलाव, काट-छांट और दोबारा अंक दर्ज किए जाने की पुष्टि हुई। एजेंसी ने प्रत्येक संदिग्ध उत्तर पुस्तिका की वैज्ञानिक जांच कराकर अदालत के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए।
ओएमआर शीट और अंकतालिका में मिला बड़ा अंतर
जांच में यह भी सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने ओएमआर शीट में बहुत कम उत्तर भरे थे, लेकिन आधिकारिक अंकतालिका में उन्हें अपेक्षा से कहीं अधिक अंक दिए गए। सीबीआई का कहना है कि वास्तविक ओएमआर शीट और जारी अंकों के बीच स्पष्ट विरोधाभास मिला, जो कथित फर्जीवाड़े का महत्वपूर्ण आधार है।
उत्तर पुस्तिकाओं में काट-छांट और पुनर्मूल्यांकन में बड़ा अंतर
सीबीआई ने दावा किया कि मुख्य परीक्षा की अनेक उत्तर पुस्तिकाओं में मूल अंकों को काटकर या मिटाकर अधिक अंक दर्ज किए गए। इसके अलावा वर्ष 2019 में विशेषज्ञों की निगरानी में कराए गए पुनर्मूल्यांकन में कई अभ्यर्थियों के वास्तविक अंकों और जेपीएससी द्वारा दिए गए अंकों के बीच 30 से 80 प्रतिशत तक का अंतर पाया गया।
मूल्यांकनकर्ताओं के बयान भी जांच का हिस्सा
जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई मूल्यांकनकर्ताओं ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयानों में स्वीकार किया कि उन्होंने दबाव अथवा निर्देश के आधार पर कुछ अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए थे। इन बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।
रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिन अभ्यर्थियों के अंकों में सबसे अधिक वृद्धि पाई गई, उनमें कई तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों के रिश्तेदार बताए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि इससे हितों के टकराव और कथित पक्षपात के संकेत मिलते हैं।
परीक्षा प्रक्रिया और रिकॉर्ड पर भी उठे सवाल
जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि परीक्षा की स्कैनिंग, कोडिंग, डिकोडिंग और परिणाम तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य नियमों के विपरीत एक निजी व्यक्ति को सौंपे गए थे। सीबीआई के अनुसार, इस नियुक्ति से संबंधित वैध आदेश उपलब्ध नहीं मिला, जबकि प्रस्तुत दस्तावेजों में बैकडेटिंग के संकेत भी पाए गए।
इसके अलावा, प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने को भी एजेंसी ने जांच में गंभीर मुद्दा बताया है।
निर्धारित संख्या से अधिक अभ्यर्थियों का चयन
सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा में निर्धारित 1,720 अभ्यर्थियों के स्थान पर 16,314 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया, जबकि मुख्य परीक्षा में निर्धारित 516 के बजाय 804 अभ्यर्थियों को चयनित किया गया। एजेंसी ने इसे परीक्षा नियमों के उल्लंघन का मामला बताया है।
