रांची : विशेष गहन पुनरीक्षण और आगामी जनगणना को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने राज्यभर में संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। पार्टी पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्यभर में बैठकों का दौर शुरू हो गया है।
पार्टी महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय विभिन्न जिलों में संगठनात्मक बैठकों का नेतृत्व कर रहे हैं। इन बैठकों में जिला पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल एजेंट को विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, मतदाता सूची सत्यापन और जनगणना से जुड़े मुद्दों की जानकारी दी जा रही है। साथ ही कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश भी दिया गया है।
मुख्यमंत्री आवास में हुई थी रणनीतिक बैठक
बताया गया कि 20 और 21 अप्रैल 2026 को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में दो दिवसीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर विशेष जोर दिया था। बैठक के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण और जनगणना से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा था कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में संगठन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है और कार्यकर्ताओं को हर स्तर पर सक्रिय रहना होगा। इसी रणनीति के तहत 25 मई को लोहरदगा और 26 मई को गुमला में बड़ी संगठनात्मक बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें बूथ स्तर तक के पदाधिकारी और एजेंट शामिल हुए।
जून में कई जिलों में होंगी बैठकें
झामुमो ने अगले चरण की बैठकों का कार्यक्रम भी जारी कर दिया है। पार्टी के अनुसार 2 जून को पश्चिम सिंहभूम, 3 जून को पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां तथा 4 जून को सिमडेगा में संगठनात्मक बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में जिला स्तर से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे।
बैठकों में कार्यकर्ताओं को यह भी बताया जा रहा है कि मतदाता सूची सत्यापन के दौरान लोगों की किस तरह मदद करनी है और कैसे हर पात्र व्यक्ति का नाम सूची में सुनिश्चित कराया जा सकता है।
भाजपा पर झामुमो का हमला
बैठकों के दौरान झामुमो भाजपा पर भी लगातार हमला बोल रही है। विनोद पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति गरीबों और कमजोर वर्गों के अधिकारों को सीमित करने वाली रही है। उन्होंने कहा कि पहले योजनाओं और अधिकारों में बाधा डाली जाती है और बाद में उसी मुद्दे पर राजनीति की जाती है।
उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण और तकनीकी प्रक्रियाओं के नाम पर गरीबों, आदिवासियों, दलितों और पिछड़े वर्गों को व्यवस्था से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे तो भविष्य में उन्हें राशन और अन्य सरकारी योजनाओं से भी वंचित किया जा सकता है।
गांव-गांव तक अभियान चलाने की तैयारी
झामुमो अब इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव और बूथ स्तर तक अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। पार्टी का कहना है कि उसका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत बनाना है। आने वाले दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों में लगातार बैठकों और जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

