रांची: झारखंड में बढ़ते नशे के मामलों के बीच केंद्रीय मनश्चिकित्सा संस्थान (सीआईपी), रांची ने नशा मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारत सरकार के नेशनल ड्रग डी-एडिक्शन प्रोग्राम के तहत 29 जुलाई से सीआईपी में इलाज के लिए आने वाले नशा पीड़ित मरीजों को आवश्यक दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे पहले मरीजों को ये दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती थीं।
संस्थान के निदेशक डॉ. विजय चौधरी की पहल पर शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत मरीजों को मुफ्त दवा देने के साथ-साथ ‘मेडिसिन इंफॉर्मेशन सर्विस’ भी शुरू की गई है। इस सेवा के माध्यम से मरीजों और उनके परिजनों को दवाओं के सही उपयोग, उचित खुराक, संभावित दुष्प्रभाव और आवश्यक सावधानियों की वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी, ताकि उपचार के बाद मरीजों का पुनर्वास और समाज में पुनर्स्थापन बेहतर तरीके से हो सके।
सिंथेटिक ड्रग्स की गिरफ्त में बढ़ रहे युवा
सीआईपी के चिकित्सकों के अनुसार, संस्थान में इलाज के लिए आने वाले लगभग 40 प्रतिशत मरीज सिंथेटिक ड्रग्स (सूखे नशे) की लत से प्रभावित हैं। यह स्थिति बताती है कि पारंपरिक नशे की तुलना में युवाओं के बीच सिंथेटिक नशे का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, सीआईपी के नशा मुक्ति केंद्र में हर वर्ष 7 से 8 हजार मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। वहीं भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी पहले 700 के आसपास थी, जो अब बढ़कर करीब 1,000 तक पहुंच गई है।
सप्ताह में दो दिन संचालित होता है विशेष नशा मुक्ति क्लिनिक
सीआईपी परिसर में प्रत्येक बुधवार और शनिवार को विशेष नशा मुक्ति क्लिनिक संचालित किया जाता है। यहां प्रतिदिन औसतन 30 से 35 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। संस्थान का मानना है कि मुफ्त दवा और दवा संबंधी वैज्ञानिक परामर्श की इस नई व्यवस्था से नशा पीड़ितों को बेहतर उपचार मिलने के साथ आर्थिक राहत भी मिलेगी और उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने में सहायता मिलेगी।
