रांची: झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी नियुक्ति विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता जयराम महतो रविवार, 9 अगस्त को 24 घंटे के निर्जला अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने पुराने विधानसभा परिसर में सुबह करीब 6:50 बजे अनशन शुरू किया। उनका यह उपवास जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 15 दिनों से जारी छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल के समर्थन में है।

छात्रों की मांगों के समर्थन में अनशन

जयराम महतो ने अपने सोशल मीडिया संदेश के माध्यम से कहा कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र 25 जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं। कई छात्र लगातार भूख हड़ताल पर हैं, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ रही है। इसके बावजूद सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज पूरे देश और दुनिया तक पहुंच रही है, लेकिन राज्य सरकार तक यह आवाज नहीं पहुंच रही है। उनके एक दिवसीय निर्जला उपवास का उद्देश्य छात्रों की मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाना है।

सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी

जयराम महतो ने कहा कि यदि उनके इस उपवास के बाद सरकार ने छात्रों की मांगों पर प्रभावी कदम उठाया तो यह सकारात्मक होगा। अन्यथा आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी और संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने सरकार के सामने प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित जेपीएससी और जेएसएससी की सभी नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किया जाए। इसके साथ ही कथित परीक्षा घोटाले में शामिल दोषियों को गिरफ्तार करने और पूरे मामले की सीबीआई या ईडी से जांच कराने की मांग की।

जेपीएससी-जेएसएससी पदाधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

जयराम महतो ने जेपीएससी और जेएसएससी के पदाधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी अधिकारी की कथित अनियमितताओं में संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

25 जुलाई से जारी है छात्रों का आंदोलन

गौरतलब है कि जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र 25 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन के दौरान कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे हैं। ऐसे में जयराम महतो के निर्जला अनशन से छात्र आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने के साथ ही सरकार पर भी दबाव बढ़ने के संकेत हैं।

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