रांची: बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम (बीएसआईडीसीएल) की झारखंड स्थित टाटीसिलवे इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट फैक्टरी (ईईएफ) और सामलौंग हाइटेंशन इंसुलेटर फैक्टरी के बंद होने के तीन दशक बाद भी कर्मचारियों की परेशानियां खत्म नहीं हुई हैं। वेतन, ग्रेच्युटी और लीव इनकैशमेंट जैसी बकाया राशि का भुगतान अब तक पूरा नहीं हो सका है। वहीं, कर्मचारियों और उनके आश्रितों को आवास खाली करने के नोटिस मिलने के बाद मामला अब झारखंड हाईकोर्ट में पहुंच गया है। इस मामले पर 30 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है।
30 वर्षों से बंद हैं दोनों कारखाने
बीएसआईडीसीएल के अधीन संचालित दोनों कारखाने पिछले करीब 30 वर्षों से पूरी तरह बंद हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें वर्षों से वेतन और अन्य सेवा लाभों का पूरा भुगतान नहीं मिला। इस बीच सामलौंग स्थित हाइटेंशन इंसुलेटर फैक्टरी की करीब 40 एकड़ जमीन दो निजी पक्षों को लीज पर दिए जाने का भी मामला सामने आया है।
200 आवासों में रह रहे कर्मचारी और उनके आश्रित
कारखाना बंद होने के बावजूद करीब 200 आवासों में कर्मचारी और उनके परिवार पिछले 50 वर्षों से रह रहे हैं। दो वर्ष पहले प्रबंधन ने उन्हें आवास खाली करने का नोटिस जारी किया था। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपने स्तर पर पानी और बिजली की व्यवस्था करते हैं तथा नियमित रूप से बिल का भुगतान भी करते हैं।
उनकी मांग है कि एचईसी और बोकारो स्टील सिटी की तर्ज पर इन आवासों को उन्हें दीर्घकालीन लीज पर दिया जाए। इसी मांग को लेकर उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
2007 में लिया गया था लीज का निर्णय
कर्मचारियों का दावा है कि 12 जून 2007 को बीएसआईडीसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में संकल्प संख्या 294/4742 के तहत आवासों को लीज पर देने का निर्णय लिया जा चुका था। इसके बावजूद अब तक इस फैसले को लागू नहीं किया गया।
आर्थिक तंगी में गुजरी जिंदगी
कर्मचारियों के अनुसार, वर्षों तक वेतन नहीं मिलने के कारण कई परिवार आर्थिक संकट से जूझते रहे। कुछ कर्मचारियों की इलाज के अभाव में असमय मृत्यु हो गई, जबकि कई लोगों को अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़ानी पड़ी। परिवार चलाने के लिए कई कर्मचारियों ने सब्जी बेची, रिक्शा चलाया और दिहाड़ी मजदूरी तक की।
30 जुलाई को हाईकोर्ट में होगी अहम सुनवाई
बकाया भुगतान और आवास लीज के मुद्दे पर दायर दोनों याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई 30 जुलाई को दोपहर 2:15 बजे झारखंड हाईकोर्ट में होगी। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने सभी पक्षों को शपथपत्र और अपने-अपने तर्कों का सार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
90 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी ने बयां किया दर्द
ईईएफ एवं हाइटेंशन रिटायर्ड इम्प्लायज एसोसिएशन के महासचिव एस.एस. प्रसाद ने बताया कि वे वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त हुए थे। उनके लगभग चार लाख रुपये के बकाया का भुगतान आज तक नहीं हुआ। 90 वर्ष की उम्र में अब आवास खाली करने के नोटिस से वे और अन्य कर्मचारी असमंजस की स्थिति में हैं। उनका कहना है कि जीवनभर जिस आवास में रहे, अब उसे छोड़कर कहां जाएं, यही सबसे बड़ी चिंता है।
