Ranchi : गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से शिष्टाचार मुलाकात कर नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, मेदिनीनगर के छात्र-छात्राओं की विभिन्न समस्याओं को उनके समक्ष उठाया। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल को एक मांग पत्र सौंपते हुए विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की।

विधायक ने कहा कि विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों की समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और भविष्य पर पड़ रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

समय पर परीक्षा और परिणाम की उठाई मांग

मुलाकात के दौरान सत्येंद्र नाथ तिवारी ने विश्वविद्यालय में परीक्षाओं और परिणामों में होने वाली देरी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष परीक्षा और रिजल्ट में विलंब होने से छात्रों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित होता है और उन्हें उच्च शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने राज्यपाल से परीक्षा प्रक्रिया को नियमित और समयबद्ध बनाने की दिशा में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

अनियमितता और भ्रष्टाचार पर जताई चिंता

विधायक ने विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों में कथित अनियमितताओं तथा भ्रष्टाचार के मामलों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि इन समस्याओं पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसका सबसे अधिक नुकसान छात्रों को उठाना पड़ेगा।

उन्होंने शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

छात्रों के हित में कार्रवाई की उम्मीद

सत्येंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में छात्रों के भविष्य के साथ समझौता नहीं किया जा सकता। समय पर परीक्षा, समय पर परिणाम और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक छात्र का अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्यपाल इस मामले को गंभीरता से लेते हुए छात्रों के हित में आवश्यक कदम उठाएंगे।

छात्रों में जगी नई उम्मीद

विधायक की इस पहल के बाद नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय से जुड़े छात्रों में उम्मीद की नई किरण जगी है। छात्रों का मानना है कि उनकी समस्याएं अब राज्यपाल स्तर तक पहुंच चुकी हैं, जिससे शैक्षणिक सत्र को नियमित करने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

फिलहाल विश्वविद्यालय की व्यवस्था में संभावित सुधार और राज्यपाल स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर छात्रों और शिक्षाविदों की नजरें टिकी हुई हैं।

Share.
Leave A Reply

Exit mobile version