लातेहार: सावन के महीने में देशभर में कांवड़ यात्राओं का आयोजन होता है। इसी क्रम में झारखंड के लातेहार जिले का महुआडांड़ अनुमंडल इस वर्ष एक नई धार्मिक परंपरा की शुरुआत का साक्षी बनने जा रहा है। 12 अगस्त को पलामू टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच स्थित लोध फॉल से पवित्र जल लेकर श्रद्धालु करीब 20 किलोमीटर की पदयात्रा करेंगे। यात्रा के बाद गारू प्रखंड की मायापुर पंचायत स्थित सरनाधाम के नर्मदेश्वर शिव मंदिर में जलाभिषेक किया जाएगा।
आयोजन को प्रकृति, आस्था और ग्रामीण संस्कृति के संगम के रूप में देखा जा रहा है। आयोजन समिति के अनुसार, आने वाले वर्षों में इस यात्रा को स्थायी धार्मिक परंपरा के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
लोध फॉल से शुरू होगी कांवड़ यात्रा
लोध फॉल झारखंड के प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल है। सावन के दौरान बारिश के कारण जलप्रपात का स्वरूप और भी भव्य हो जाता है। इसी जलधारा से कांवड़ में जल लेकर श्रद्धालु हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष के साथ सरनाधाम के लिए रवाना होंगे।
यात्रा का मार्ग पहाड़ी रास्तों, जंगलों, छोटी नदियों, ग्रामीण इलाकों और हरियाली से होकर गुजरेगा। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ श्रद्धालुओं को प्रकृति से जोड़ना भी है।
यात्रा मार्ग पर लगाए जाएंगे सेवा शिविर
यात्रा को व्यवस्थित बनाने के लिए मानस मणि दीप सेवा संस्थान की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। मार्ग में सेवा शिविर, पेयजल, प्राथमिक उपचार और विश्राम की व्यवस्था की जाएगी। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सहायता के लिए अलग-अलग स्थानों पर मौजूद रहेंगे।
यात्रा के दौरान भजन मंडलियों, ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के साथ धार्मिक माहौल तैयार किया जाएगा। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखने और प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है, ताकि वन क्षेत्र और जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता सुरक्षित रहे।
11 सदस्यीय समिति संभाल रही आयोजन की जिम्मेदारी
कांवड़ यात्रा के आयोजन के लिए 11 सदस्यीय कार्यकारी समिति का गठन किया गया है। समिति में अध्यक्ष जानकी सिंह, सचिव कमलेश यादव और कोषाध्यक्ष श्रीमणि यादव शामिल हैं। समिति के सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को यात्रा से जोड़ने के साथ श्रद्धालुओं के पंजीकरण और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
आयोजकों का लक्ष्य यात्रा को किसी एक गांव या संस्था तक सीमित रखने के बजाय पूरे क्षेत्र का सामूहिक आयोजन बनाना है।
धार्मिक पर्यटन को मिल सकता है बढ़ावा
लोध फॉल से सरनाधाम तक प्रस्तावित कांवड़ यात्रा से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों, वाहन संचालकों, छोटे व्यवसायों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकता है।
महुआडांड़, गारू और लोध फॉल क्षेत्र को धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन के साथ जोड़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन गतिविधियों की नई संभावनाएं भी पैदा हो सकती हैं।
प्रकृति और आस्था के संरक्षण पर जोर
संस्थान के अध्यक्ष सुभाष कुमार सिंह के अनुसार, आयोजन का उद्देश्य केवल जलाभिषेक कराना नहीं, बल्कि ऐसी परंपरा विकसित करना है जिसमें धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण और सामाजिक सहभागिता को भी महत्व मिले।
यदि यह यात्रा नियमित रूप से आयोजित होती है तो लोध फॉल से सरनाधाम तक का मार्ग आने वाले वर्षों में झारखंड की एक विशिष्ट धार्मिक यात्रा के रूप में पहचान बना सकता है।
12 अगस्त को दिखेगा अनोखा संगम
12 अगस्त को लोध फॉल से पवित्र जल लेकर श्रद्धालुओं के सरनाधाम की ओर बढ़ने के साथ महुआडांड़ और गारू क्षेत्र में धार्मिक उत्सव का माहौल बनेगा। जंगलों और पहाड़ी रास्तों से गुजरती कांवड़ यात्रा में प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि यह पहल आने वाले समय में क्षेत्र की धार्मिक और पर्यटन पहचान को नई दिशा देगी।
