रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू कर दी है। ईडी ने सोमवार को इस मामले में इसीआईआर दर्ज की है। अब एजेंसी कथित घोटाले में पैसों के लेन-देन और उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच करेगी।

ईडी ने परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल के दोनों निदेशकों समेत कुल आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया है। ईडी की जांच शुरू होने के बाद मामला केवल जेपीएससी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से टीडीपीएल को दिए गए परीक्षा कार्य भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

नियमों की अनदेखी कर टीडीपीएल को काम देने का आरोप

ईडी के अनुसार, जेपीएससी ने नियमों का पालन किए बिना नामांकन के आधार पर टीडीपीएल को परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य सौंपे। एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी देने से पहले टीडीपीएल की पर्याप्त छानबीन भी नहीं की गई।

ईडी अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि परीक्षा कार्यों के आवंटन में किस तरह के वित्तीय लेन-देन हुए और कथित अनियमितताओं से जुड़े पैसों का प्रवाह किन लोगों तक पहुंचा।

ईडी ने आठ लोगों को बनाया नामजद अभियुक्त

ईडी की इसीआईआर में टीडीपीएल के निदेशक सत्यपाल सिंह और रामवीर सिंह के अलावा जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, जेपीएससी कर्मी मनोज तिर्की और सोनू कुमार को नामजद किया गया है।

इसके अलावा टीडीपीएल से जुड़े मोहम्मद उस्मान, अवध और मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी को भी अभियुक्त बनाया गया है।

नामजद अभियुक्त

  • सत्यपाल सिंह — टीडीपीएल निदेशक
  • रामवीर सिंह — टीडीपीएल निदेशक
  • श्वेता गुप्ता — उप-परीक्षा नियंत्रक, जेपीएससी
  • मनोज तिर्की — जेपीएससी कर्मी
  • सोनू कुमार — जेपीएससी कर्मी
  • मोहम्मद उस्मान — टीडीपीएल कर्मी
  • अवध — टीडीपीएल कर्मी
  • अभय कुमार तिवारी — टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर

जेएसएससी की परीक्षाएं भी जांच के दायरे में

ईडी के अनुसार, जेपीएससी से पहले टीडीपीएल को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से भी कुछ परीक्षाओं का काम दिया गया था। बाद में कथित अनियमितताओं के कारण उसका कार्यादेश रद्द कर दिया गया और कंपनी को तीन साल के लिए प्रतिबंधित किया गया था।

ईडी ने यह भी उल्लेख किया है कि उत्तर प्रदेश में आयोजित परीक्षाओं को लेकर भी टीडीपीएल पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। ऐसे में अब झारखंड में इस एजेंसी को दिए गए परीक्षा कार्यों की भी जांच की जा सकती है।

पूर्व परीक्षा नियंत्रक ने उठाई थी गड़बड़ी की बात

ईडी के अनुसार, जेपीएससी में टीडीपीएल को परीक्षा से संबंधित काम मिलने के बाद तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा ने एजेंसी के कार्यों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी तत्कालीन आयोग अध्यक्ष को दी थी।

इसके बाद असीम किस्पोट्टा से परीक्षा नियंत्रक का कार्य वापस लेकर श्वेता गुप्ता को सौंप दिया गया था। श्वेता गुप्ता के तबादले के बाद भी उन्हें आयोग में काम करते रहने की अनुमति दिए जाने का भी उल्लेख ईडी की कार्रवाई में किया गया है।

आंसर की भेजने के आरोप की भी जांच

ईडी के आरोपों के अनुसार, सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा की उत्तर कुंजी परिणाम घोषित होने से पहले श्वेता गुप्ता ने टीडीपीएल कर्मी मोहम्मद उस्मान को व्हाट्सऐप के जरिए भेजी थी।

हालांकि, इन आरोपों और ईडी की इसीआईआर से जुड़ी सभी जानकारियों की सीआईडी और ईडी की ओर से स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कथित वित्तीय लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

अब वित्तीय लेन-देन की होगी जांच

ईडी की एंट्री के बाद जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद का दायरा और बढ़ गया है। सीआईडी जहां परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े आपराधिक पहलुओं की जांच कर रही है, वहीं ईडी अब मनी ट्रेल और कथित वित्तीय लेन-देन की पड़ताल करेगी।

इस कार्रवाई से आने वाले दिनों में परीक्षा प्रक्रिया, टीडीपीएल की भूमिका और आयोग से जुड़े अधिकारियों के बीच कथित संबंधों को लेकर जांच और तेज होने की संभावना है।

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