धनबाद: देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखने वाला धनबाद आने वाले वर्षों में केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शहर भविष्य में क्रिटिकल मिनरल्स, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और खनिज अनुसंधान का राष्ट्रीय केंद्र बन सकता है।
प्रभात खबर के स्थापना दिवस विशेषांक के लिए केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्र तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान धनबाद के माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एवं टेक्समिन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रो. धीरज कुमार ने धनबाद के भविष्य को लेकर अपने शोध और आकलन साझा किए हैं।
वर्ष 2038 तक ऊर्जा सुरक्षा में बनी रहेगी अहम भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार झरिया कोलफील्ड सहित धनबाद के विशाल कोयला भंडार आने वाले वर्षों तक देश की ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत आधारशिला बने रहेंगे। बढ़ती बिजली मांग, औद्योगिकीकरण और आधारभूत ढांचे के विस्तार के कारण वर्ष 2038 तक कोयले की अहम भूमिका बनी रहने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक खनन तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग से झरिया क्षेत्र में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल का अधिक सुरक्षित और प्रभावी दोहन संभव होगा।
लाखों लोगों की आजीविका का आधार है कोयला उद्योग
धनबाद की अर्थव्यवस्था आज भी बड़े पैमाने पर कोयला उद्योग पर आधारित है। बीसीसीएल और अन्य खनन कंपनियों के माध्यम से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जबकि परिवहन, मशीनरी, ठेका कार्य, लोडिंग, होटल, व्यापार, सुरक्षा और सेवा क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका भी इस उद्योग पर निर्भर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले एक दशक तक इस व्यवस्था में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
स्वच्छ ऊर्जा के दौर में भी कोयले की रहेगी अहम भूमिका
देश में लगभग 74 प्रतिशत बिजली का उत्पादन अभी भी ताप विद्युत संयंत्रों के माध्यम से होता है। हालांकि सौर और पवन ऊर्जा का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन मौसम पर निर्भरता के कारण उनकी सीमाएं हैं। अस्पताल, रेलवे, इस्पात संयंत्र, डेटा सेंटर और बड़े उद्योगों की निरंतर बिजली आवश्यकता फिलहाल कोयला आधारित बिजली संयंत्र ही पूरी कर रहे हैं।
सरकार घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम कर रही है।
नई तकनीकें बदलेंगी धनबाद की तस्वीर
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में कोलबेड मीथेन, कोल माइन मीथेन, कोयला गैसीकरण, क्लीन कोल टेक्नोलॉजी, सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत संयंत्र और कार्बन कैप्चर एवं स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकें धनबाद को नई पहचान देंगी।
रेलवे ढुलाई क्षमता में वृद्धि, आधुनिक खदानों का विकास और नई तकनीकों के इस्तेमाल से धनबाद ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ऊर्जा प्रौद्योगिकी और अनुसंधान का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है।
क्रिटिकल मिनरल्स बनेंगे नई अर्थव्यवस्था की नींव
विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक पर्यावरणीय चुनौती माने जाने वाले ओवरबर्डन, फ्लाई ऐश और खनन अपशिष्ट भविष्य में बहुमूल्य खनिजों का स्रोत बन सकते हैं। इनमें मौजूद क्रिटिकल मिनरल्स धनबाद को भारत की नई खनिज अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाने की क्षमता रखते हैं।
भारत सरकार ने वर्ष 2024 में 30 क्रिटिकल मिनरल्स की सूची जारी की है, जिनमें से 24 खनिजों की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वर्ष 2031 तक 100 से अधिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन से मिलेगी गति
भारत सरकार ने वर्ष 2025 से 2031 तक राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन के लिए 16,300 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य देश में लिथियम, तांबा, रेयर अर्थ एलिमेंट्स सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुसंधान, निवेश और आधुनिक तकनीकों पर समान रूप से ध्यान दिया गया, तो आने वाले वर्षों में धनबाद केवल ‘कोल कैपिटल’ ही नहीं, बल्कि ‘एनर्जी एंड क्रिटिकल मिनरल कैपिटल’ के रूप में भी देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

