रांची: झारखंड की महागठबंधन सरकार में बेहतर तालमेल और नियमित संवाद सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कांग्रेस ने एक बार फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष समन्वय समिति के गठन की मांग उठाई है। पार्टी का मानना है कि गठबंधन सरकार के प्रभावी संचालन और सहयोगी दलों के बीच बेहतर समन्वय के लिए अब औपचारिक कॉर्डिनेशन कमेटी का गठन आवश्यक हो गया है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ऐसी समिति बनने से सरकार और गठबंधन के घटक दलों के बीच संवाद मजबूत होगा। साथ ही, नीतिगत मामलों और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर समय-समय पर उत्पन्न होने वाले मतभेदों का समाधान भी संस्थागत स्तर पर किया जा सकेगा।

बोर्ड, निगम और आयोगों में प्रतिनिधित्व का मुद्दा

कांग्रेस का कहना है कि विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की जीत में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अब तक विभिन्न बोर्ड, निगम, आयोग और अन्य सरकारी संस्थाओं में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि समन्वय समिति का गठन होता है तो नियुक्तियों, संगठन और सरकार के बीच तालमेल तथा गठबंधन के साझा एजेंडे से जुड़े फैसलों पर बेहतर तरीके से विचार-विमर्श किया जा सकेगा।

संवाद की कमी पर राजनीतिक चर्चा

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि समन्वय समिति के अभाव में कई मुद्दों पर कांग्रेस और झामुमो के बीच संवाद की कमी महसूस की जा रही है। कुछ अवसरों पर सरकार के निर्णयों को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक रूप से असहमति भी जताई है।

पार्टी का मानना है कि यदि औपचारिक समन्वय तंत्र मौजूद होगा तो ऐसे विवाद सार्वजनिक होने से पहले ही बातचीत के माध्यम से उनका समाधान निकाला जा सकेगा।

सभी सहयोगी दलों के नेताओं को शामिल करने की मांग

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता अथवा उनके प्रतिनिधित्व में गठित समन्वय समिति में महागठबंधन के सभी प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया जाए।

प्रस्तावित समिति समय-समय पर बैठक कर सरकार की प्राथमिकताओं, विकास योजनाओं, राजनीतिक मुद्दों और संगठनात्मक अपेक्षाओं पर चर्चा कर सकती है। इससे गठबंधन के भीतर विश्वास मजबूत होने के साथ निर्णय प्रक्रिया भी अधिक सहभागी बनने की उम्मीद है।

कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने पर जोर

कांग्रेस का कहना है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय से सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि उन्हें विभिन्न संस्थाओं में जिम्मेदारी मिलेगी तो वे सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन सरकारों में समन्वय समिति सहयोगी दलों के बीच संवाद बनाए रखने, नीतिगत मतभेद दूर करने और सरकार के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हालांकि, समन्वय समिति के गठन को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बावजूद इसके, कांग्रेस की लगातार उठ रही इस मांग ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री के अगले निर्णय पर टिकी हुई है।

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