बोकारो : चंदनकियारी प्रखंड के दुबेकांटा के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। हादसे में दंपती की मौत के बाद उनके तीन छोटे बच्चे बेसहारा हो गए हैं। माता-पिता के असमय निधन के बाद अब पल्लवी, विमल मांझी और विद्युत मांझी के सामने जिंदगी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बुधवार को विधायक उमाकांत रजक, डीसी अजय नाथ झा, एसपी नाथू सिंह मीणा समेत कई अधिकारी बच्चों के घर पहुंचे और उनका हालचाल जाना। बच्चों की स्थिति देखकर अधिकारियों ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
भोजन और जरूरी सुविधाओं का दिया निर्देश
डीसी अजय नाथ झा ने मौके पर मौजूद बीडीओ और पंचायत सेवक को स्पष्ट निर्देश दिया कि बच्चों को भोजन और जरूरी सुविधाओं में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार बच्चों की स्थिति पर नजर रखेगा और जरूरत के अनुसार हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
जरूरी दस्तावेज जल्द तैयार होंगे
डीसी ने अधिकारियों को बच्चों के माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र, स्थानीय निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर तैयार करने का निर्देश दिया।
प्रशासन का कहना है कि दस्तावेज जल्द बनने से बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिल सकेगा।
बच्चों की पढ़ाई नहीं होगी प्रभावित
जिला प्रशासन ने बच्चों की शिक्षा को लेकर भी तैयारी शुरू कर दी है। डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों का नामांकन कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय और जवाहर नवोदय विद्यालय तेनुघाट व नावाडीह में सुनिश्चित कराया जाए।
प्रशासन का उद्देश्य है कि हादसे के बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
मानसिक सहारे के लिए होगी काउंसलिंग
माता-पिता को खोने के बाद बच्चों की मानसिक स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने काउंसलिंग की व्यवस्था करने का भी फैसला लिया है।
डीसी ने अनुमंडल पदाधिकारी को निर्देश दिया कि किसी गैर सरकारी संस्था की मदद से बच्चों की काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल और भविष्य की योजना तैयार की जाए।
आर्थिक सुरक्षा और आवास की तैयारी
प्रशासन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए बैंक खाते खुलवाने की तैयारी भी कर रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बच्चों को मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि सुरक्षित रखी जाए और जरूरत पड़ने पर फिक्स डिपॉजिट भी कराया जाए।
इसके अलावा बच्चों के लिए आवास की व्यवस्था को लेकर भी पहल शुरू कर दी गई है। डीसी ने बीडीओ को निर्देश दिया कि अबुआ आवास योजना या प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर स्वीकृत कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला स्तर पर भेजा जाए।
डीसी अजय नाथ झा ने कहा कि राज्य सरकार ऐसे मामलों को लेकर बेहद संवेदनशील है और बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत अधिकतम सहायता दिलाई जाएगी।
इस दौरान विधायक उमाकांत रजक और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने दुर्घटना स्थल का भी निरीक्षण किया।

