पाकुड़ : झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सारथी योजना को लेकर पाकुड़ में बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि योजना के तहत संचालित जेआरएस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड संस्थान ने साहिबगंज और पाकुड़ के कई गरीब छात्रों से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की वसूली की और बाद में उन्हें परेशान किया गया।

इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और राजनीतिक रंग भी ले लिया है। दर्जनों छात्रों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की है।

नौकरी और विदेश भेजने के नाम पर वसूली का आरोप

पीड़ित छात्रों का आरोप है कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बड़े-बड़े सपने दिखाए गए और इसी दौरान कई लोगों से अलग-अलग राशि वसूली गई।

छात्रों के अनुसार विशाल प्रजापति नामक व्यक्ति ने खुद को सऊदी अरब के बड़े ठेकेदार का बेटा बताकर वीजा और टिकट के नाम पर पैसे लिए। वहीं निवेक रवानी से करीब एक लाख पांच हजार नौ सौ रुपये वसूले गए। इसके अलावा अन्य छात्रों से प्लेसमेंट के नाम पर एक हजार से ग्यारह हजार रुपये तक की राशि लेने का आरोप है।

प्रमाण पत्र मांगने पर धमकी का आरोप

छात्र दीपक कुमार ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने प्रमाण पत्र की मांग की तो प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद आसिफ इकबाल ने उनके साथ गाली-गलौज की और धमकी भी दी।

छात्रों का कहना है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बावजूद न तो प्रमाण पत्र दिया जा रहा है और न ही नौकरी का कोई स्पष्ट पता है।

प्रशिक्षण 17 नवंबर 2025 से शुरू हुआ था और 22 फरवरी 2026 को समाप्त हुआ, लेकिन इसके बाद से छात्र लगातार प्रमाण पत्र और नौकरी को लेकर भटक रहे हैं।

18 मई को जब छात्र केंद्र पहुंचे तो वहां उनके साथ अभद्र व्यवहार का भी आरोप लगाया गया।

राजनीतिक हस्तक्षेप और जांच की मांग

राजद जिलाध्यक्ष महावीर मड़ैया ने सेंटर पहुंचकर मामले की जानकारी ली और प्रबंधन से बातचीत की। उन्होंने कहा कि दो महीने के भीतर सभी लंबित परीक्षाएं पूरी कर छात्रों को राहत दी जाए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में वसूली और धमकी के आरोप सही पाए गए तो प्रशासन और विभागीय मंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।

संस्थान ने आरोपों को बताया गलत

वहीं जेआरएस टेक्नोलॉजी के प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद आसिफ इकबाल खान ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि तकनीकी कारणों से परीक्षा और प्रमाण पत्र में देरी हुई है और प्रक्रिया जल्द पूरी कर दी जाएगी। उन्होंने संस्थान की छवि खराब करने की साजिश का आरोप लगाया है।

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