नई दिल्ली: राम मंदिर के कथित दान गबन मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दान से जुड़े सभी आरोपों की पारदर्शी तरीके से जांच होनी चाहिए।

मंदिर निर्माण प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस शुरू से यह कहती रही है कि अयोध्या परियोजना और राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की निगरानी में आगे बढ़ी। उन्होंने दावा किया कि अदालत के फैसले के बाद मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया भी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की देखरेख में हुई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता चंपत राय ट्रस्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। ऐसे में यदि दान में कथित गड़बड़ी या गबन के आरोप सामने आते हैं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

महिपाल सिंह के दावों का किया उल्लेख

कांग्रेस नेता ने कहा कि सबसे पहले महिपाल सिंह ने कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जानकारी चंपत राय को दी थी, लेकिन उनके आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत उन्हें ही ट्रस्ट से बाहर कर दिया गया।

पवन खेड़ा ने कहा कि अब सामने आ रही जानकारियों को देखते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि दान की राशि के उपयोग और उसके पूरे वित्तीय प्रवाह की जांच की जाए तथा यह भी पता लगाया जाए कि इस मामले के तार किन लोगों और किन शहरों से जुड़े हैं।

आस्था को राजनीति का विषय न बनाने की अपील

पवन खेड़ा ने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं और उनकी आस्था को किसी भी राजनीतिक दल द्वारा कवच या चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि आस्था को सबसे अधिक नुकसान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति से पहुंचा है। उनके अनुसार यह केवल चुनावी राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश की भावनाओं से जुड़ा विषय है।

कांग्रेस ने दावा किया कि भगवान राम को चुनावी मुद्दा बनाने का काम विपक्ष नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी करती रही है।

नोट: यह कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा प्रेस वार्ता में दिए गए बयान और आरोप हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस समाचार के लिखे जाने तक सामने नहीं आई है।

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