सरायकेला : झारखंड की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है। सरायकेला छऊ मुखौटा निर्माण कला के प्रख्यात गुरु सुशांत महापात्र को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। भारत सरकार के संगीत नाटक अकादमी द्वारा इसकी आधिकारिक घोषणा की गई है। पुरस्कार की घोषणा होते ही छऊ कलाकारों और कला प्रेमियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है।
छऊ कला से जुड़े कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने गुरु सुशांत महापात्र को बधाई देते हुए इसे झारखंड और विशेष रूप से सरायकेला छऊ परंपरा के लिए गौरव का क्षण बताया है। कला जगत के लोगों का कहना है कि यह सम्मान छऊ मुखौटा निर्माण की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पुरस्कार की घोषणा पर भावुक हुए सुशांत महापात्र
प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयनित होने पर 79 वर्षीय गुरु सुशांत महापात्र भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि कला के प्रति उनके दशकों लंबे समर्पण को देश ने सम्मान दिया है, जिससे उन्हें संतोष और गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने इसके लिए भारत सरकार और संगीत नाटक अकादमी के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि जीवन के इस पड़ाव पर भी उनका लक्ष्य छऊ कला और मुखौटा निर्माण की परंपरा को आगे बढ़ाना है। उन्होंने संकल्प जताया कि वे आने वाली पीढ़ियों को इस विरासत से जोड़ने का कार्य लगातार करते रहेंगे।
बचपन से सीखी मुखौटा निर्माण की कला
सुशांत महापात्र को छऊ मुखौटा निर्माण की कला विरासत में मिली है। उन्होंने मात्र आठ वर्ष की आयु में अपने बड़े पिताजी से इस कला की बारीकियां सीखना शुरू कर दिया था। वर्षों की साधना और मेहनत के बाद उन्होंने इस पारंपरिक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
वे पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित रखते हुए आधुनिक पीढ़ी तक इस कला को पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। यही कारण है कि आज उन्हें छऊ मुखौटा निर्माण के क्षेत्र में देश के अग्रणी कलाकारों में गिना जाता है।
छऊ मुखौटों ने दिलाई सरायकेला शैली को अलग पहचान
महापात्र परिवार कई पीढ़ियों से छऊ मुखौटा निर्माण कला से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1925 में प्रसन्न कुमार महापात्र ने सरायकेला शैली के छऊ नृत्य के लिए पहला आधुनिक मुखौटा तैयार किया था। इसी नवाचार ने सरायकेला छऊ को देश और दुनिया में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
सुशांत महापात्र द्वारा तैयार किए गए मुखौटों की प्रदर्शनी भारत के विभिन्न शहरों के अलावा अमेरिका, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में भी आयोजित की जा चुकी है। उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है।
पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान
गुरु सुशांत महापात्र को वर्ष 2022 में ओडिशा के पुरी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नृत्य महोत्सव “अप्सरा-2022” में गुरु ब्रह्मा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा भी उन्हें कला और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
गौरतलब है कि संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भारतीय कला जगत के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। यह सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है। सुशांत महापात्र को यह पुरस्कार मिलने से झारखंड की लोक कला और छऊ परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

