हुसैनाबाद : झारखंड सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री कमलेश सिंह ने पलामू जिले के हुसैनाबाद अनुमंडल स्थित सोहया पहाड़ी क्षेत्र में कथित अवैध और अनियंत्रित स्टोन माइनिंग को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), नई दिल्ली का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने इस संबंध में विस्तृत आवेदन भेजकर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और पर्यावरणीय क्षति का आकलन करने की मांग की है।

इसके साथ ही उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों तथा अधिकारियों को भी आवेदन की प्रतिलिपि भेजते हुए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता बताई है।

सोहया पहाड़ी को बताया क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर

कमलेश सिंह ने अपने आवेदन में कहा है कि सोहया पहाड़ी हुसैनाबाद क्षेत्र की पहचान, प्राकृतिक धरोहर और हजारों किसानों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। उनका आरोप है कि लगातार हो रही खनन गतिविधियों के कारण पहाड़ी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है और पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने आशंका जताई कि अनियंत्रित खनन का असर कृषि भूमि, भूजल स्तर और क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी पड़ सकता है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।

ग्रामीणों के विरोध के बावजूद नहीं निकला समाधान

पूर्व मंत्री ने कहा कि स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे हैं और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करते रहे हैं। इसके बावजूद समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी है।

उन्होंने हाल ही में खनन क्षेत्र में बने एक गहरे जलभराव वाले गड्ढे में युवक की डूबने से हुई मौत का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार यह घटना खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की कथित अनदेखी और संभावित लापरवाही की ओर संकेत करती है।

लीज अवधि समाप्त होने के बाद भी खनन का आरोप

कमलेश सिंह ने आवेदन में यह भी दावा किया है कि स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ खनन पट्टों की वैध अवधि समाप्त होने के बावजूद कथित रूप से खनन गतिविधियां जारी हैं। इसके अलावा समाप्त लीज वाले क्षेत्रों में विस्फोटक सामग्री ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही की सूचनाएं भी सामने आई हैं।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह खनन और पर्यावरण संबंधी नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग

पूर्व मंत्री ने मांग की है कि जांच केवल खनन संचालकों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि समय-समय पर स्थानीय लोगों द्वारा कुछ अधिकारियों की कार्यशैली और भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं।

एनजीटी से की ये प्रमुख मांगें

कमलेश सिंह ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण से सोहया पहाड़ी क्षेत्र में संचालित सभी स्टोन माइनिंग लीजों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित अनुमतियों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही वास्तविक खनन क्षेत्र का सत्यापन, पर्यावरणीय क्षति का वैज्ञानिक आकलन और जांच पूरी होने तक खनन गतिविधियों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सोहया पहाड़ी को बचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित एजेंसियां मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगी।

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