खूंटी: झारखंड के खूंटी जिले के रनिया प्रखंड के सौदे, जयपुर, लोहागढ़, मरचा, रनिया सहित आसपास के गांवों के जंगलों में इस वर्ष आम की बंपर पैदावार हुई है। पेड़ों पर लदे रसीले आमों ने ग्रामीण किसानों के चेहरे पर खुशी तो ला दी है, लेकिन बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से उनकी मेहनत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

प्रतिदिन सुबह दूरदराज के जंगलों से महिलाएं, पुरुष और बच्चे सिर पर टोकरी तथा साइकिलों में आम लेकर रनिया ब्लॉक चौक पहुंचते हैं। दिनभर खरीद-बिक्री का दौर चलता है, लेकिन खरीदार कम होने के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ रही है।

हाथियों के खतरे के बीच जंगल से लाते हैं आम

ग्रामीणों का कहना है कि इन दिनों जंगलों में जंगली हाथियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। इसके बावजूद वे सुबह तीन से चार बजे के बीच ही जान जोखिम में डालकर आम चुनने निकल जाते हैं, ताकि समय पर बाजार पहुंचकर बिक्री कर सकें। उनका कहना है कि कठिन मेहनत और जोखिम उठाने के बाद भी उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।

किसानों की मेहनत, व्यापारियों का मुनाफा

65 वर्षीय सुंदइर देवी ने बताया कि वे दूरदराज के जंगलों से सिर पर आम ढोकर बाजार तक लाती हैं, लेकिन मेहनत के अनुरूप कीमत नहीं मिलती। उनका कहना है कि व्यापारी यही आम शहरों में कई गुना अधिक कीमत पर बेचते हैं, जबकि किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पाता।

सुलोचना कुमारी ने बताया कि हाथियों का डर हमेशा बना रहता है, लेकिन परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें हर दिन जंगल जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अच्छी पैदावार के बावजूद उचित कीमत नहीं मिलने से निराशा होती है।

बेहतर बाजार मिलने से बढ़ सकती है किसानों की आय

बांधनी देवी ने बताया कि इस बार आम बेचकर करीब दो हजार रुपये कमाने का लक्ष्य रखा है, जिससे खेती-बारी के कार्यों में आर्थिक मदद मिल सके। वहीं विरशमुनि देवी ने कहा कि इस वर्ष मनरेगा के तहत विकसित बागवानी क्षेत्रों में भी आम की अच्छी पैदावार हुई है। उनका मानना है कि यदि किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिले तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

प्रशासन ने संगठित होकर बिक्री करने की दी सलाह

प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत डांग ने किसानों से स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और संगठित होकर आम की बिक्री करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी आय बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।

उन्होंने जंगलों में हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए किसानों से पूरी सतर्कता बरतने और किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाने की सलाह भी दी। ग्रामीणों का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर आम की खरीद और विपणन की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए तो जंगलों की यह प्राकृतिक संपदा क्षेत्र के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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