रांची: झारखंड की गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों के लिए राहत भरी खबर है। करीब चार महीने से बंद टेक होम राशन (टीएचआर) योजना के तहत अगले माह से आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषाहार का वितरण फिर शुरू किया जाएगा। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के प्रस्ताव को वित्त विभाग से स्वीकृति मिल गई है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष भेजा जाएगा।

एजेंसी का चयन नहीं होने के कारण अप्रैल 2026 से राज्यभर में टेक होम राशन का वितरण बंद था। इससे योजना से जुड़े करीब 14 लाख लाभुक, जिनमें गर्भवती महिलाएं, धात्री माताएं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं, पोषाहार से वंचित थे।

वित्तीय स्वीकृति के बाद शुरू होगी आपूर्ति

विभाग ने पोषाहार वितरण दोबारा शुरू करने के लिए आवश्यक वित्तीय स्वीकृति प्राप्त कर ली है। टेक होम राशन योजना के तहत लाभुकों को घर ले जाने के लिए पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिससे गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ-साथ छोटे बच्चों को आवश्यक पोषण मिल सके।

छह महीने में होगी नई एजेंसी का चयन

वित्त विभाग ने वर्तमान राशन आपूर्ति एजेंसियों को सशर्त अवधि विस्तार दिया है। साथ ही महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को छह महीने के भीतर नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके लिए विभाग जल्द ही नया टेंडर जारी करेगा।

पोषाहार में क्या मिलेगा?

टेक होम राशन के तहत लाभुकों को पोषण मानकों के अनुरूप सूखा राशन या रेडी-टू-कुक मिश्रण उपलब्ध कराया जाता है। इसमें दाल, सोयाबीन, मूंगफली समेत अन्य पौष्टिक सामग्री से तैयार खाद्य पैकेट शामिल होते हैं।

क्या है टेक होम राशन योजना?

टेक होम राशन योजना समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) के तहत संचालित की जाती है। इसके माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को घर ले जाने के लिए पोषाहार दिया जाता है। योजना का उद्देश्य मातृ एवं शिशु कुपोषण को कम करना और उनके पोषण स्तर में सुधार करना है।

इन एजेंसियों को मिला अवधि विस्तार

फिलहाल राज्य में पोषाहार आपूर्ति के लिए तीन एजेंसियों को आठ-आठ जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • आदित्य फ्लोर लिमिटेड
  • कोटा दाल मील
  • इंटर लिक्स फूड्स प्राइवेट लिमिटेड

क्यों बंद हुआ था वितरण?

टेक होम राशन वितरण के लिए चयनित एजेंसियों का कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो गया था। नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी और पुरानी एजेंसियों को भी तत्काल अवधि विस्तार नहीं मिला। इसी कारण अप्रैल से योजना के तहत पोषाहार वितरण बंद हो गया था।

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