रांची: झारखंड के सरकारी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की कमी को दूर करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘एआई आधारित वर्चुअल क्लासरूम’ योजना को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत राज्य के 1000 सरकारी विद्यालयों में आधुनिक डिजिटल कक्षाएं संचालित की जाएंगी।
सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले पांच वर्षों में 176.07 करोड़ रुपये खर्च करेगी। चालू वित्तीय वर्ष में इस परियोजना के लिए 80.07 करोड़ रुपये के व्यय को भी स्वीकृति दी गई है।
दो केंद्रीय और पांच क्षेत्रीय स्टूडियो होंगे स्थापित
योजना के प्रभावी संचालन के लिए राज्य मुख्यालय में दो केंद्रीय स्टूडियो स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के सभी पांच प्रमंडलों के डायट संस्थानों में एक-एक क्षेत्रीय स्टूडियो बनाया जाएगा। इन स्टूडियो के माध्यम से विशेषज्ञ शिक्षक डिजिटल माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएंगे।
यह व्यवस्था आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों की सफल टेली-एजुकेशन प्रणाली की तर्ज पर लागू की जाएगी, ताकि दूरदराज के विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी विषय विशेषज्ञों की पढ़ाई का लाभ मिल सके।
गंभीर बीमारियों से पीड़ित और दिव्यांग विद्यार्थियों को राहत
कैबिनेट ने शिक्षा से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सिकल सेल एनीमिया, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, टाइप-1 मधुमेह तथा अन्य गैर-संचारी रोगों से पीड़ित एवं दिव्यांग विद्यार्थियों को बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने के लिए 75 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति की शर्त से छूट देने को मंजूरी दी है। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी स्वीकृत की गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य होंगे आसान
मंत्रिपरिषद ने झारखंड बिल्डिंग बायलॉज-2016 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। नए प्रावधानों के तहत पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक एवं संस्थागत भवनों के निर्माण के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई की अनिवार्यता 9 मीटर से घटाकर 4.5 मीटर कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योगों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।
