गुमला: झारखंड के गुमला जिले में इस वर्ष असामान्य मौतों के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रिकॉर्ड के अनुसार, 1 जनवरी से 25 जून 2026 के बीच कुल 311 असामान्य मौतें दर्ज की गई हैं। यानी बीते 176 दिनों में औसतन प्रतिदिन लगभग दो लोगों की मौत हुई, जबकि हर 14 घंटे में एक व्यक्ति की जान गई है।

इन आंकड़ों ने जिले में सड़क सुरक्षा, कानून-व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य, जल सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सड़क हादसे बने सबसे बड़ी वजह

पोस्टमार्टम रिकॉर्ड के अनुसार, असामान्य मौतों में सबसे बड़ा कारण सड़क दुर्घटनाएं रहीं। छह माह से भी कम समय में 146 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। यह कुल मौतों का करीब 47 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में हर 29 घंटे में एक व्यक्ति सड़क दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवा रहा है।

आत्महत्या के मामलों ने भी बढ़ाई चिंता

रिपोर्ट के अनुसार, 61 लोगों ने आत्महत्या कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इसका मतलब है कि जिले में हर तीसरे दिन एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। मानसिक तनाव, पारिवारिक विवाद, आर्थिक दबाव और सामाजिक परिस्थितियों को इसके संभावित कारणों में माना जा रहा है।

डूबने से 48 लोगों की मौत

जिले की नदियों, तालाबों और अन्य जलाशयों में 48 लोगों की डूबने से मौत हुई। यह आंकड़ा जल सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता की कमी की ओर भी इशारा करता है।

हत्या, सर्पदंश और वज्रपात से भी गई जान

रिकॉर्ड के मुताबिक, इस अवधि में 21 लोगों की हत्या हुई। इसके अलावा हृदयाघात, सर्पदंश, हाथी के हमले, वज्रपात, ऊंचाई से गिरने, बिजली के करंट और आग से झुलसने जैसी घटनाओं में भी कई लोगों की मौत दर्ज की गई।

मार्च में सबसे अधिक मौतें

माहवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च सबसे अधिक मौतों वाला महीना रहा। इस दौरान 68 लोगों की असामान्य मौत हुई। इसके बाद अप्रैल में 65, फरवरी में 64, जनवरी में 59, मई में 30 और 25 जून तक जून माह में 25 मौतें दर्ज की गईं।

1 जनवरी से 25 जून 2026 तक असामान्य मौतों का विवरण

  • सड़क दुर्घटना: 146
  • आत्महत्या: 61
  • डूबने से: 48
  • हत्या: 21
  • हृदयाघात: 7
  • सर्पदंश: 4
  • हाथी हमला: 4
  • ऊंचाई से गिरने: 4
  • वज्रपात: 3
  • बिजली करंट: 1
  • आग से झुलसकर: 1
  • अन्य कारण: 11

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि गुमला जिले में सड़क सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, जल सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि असामान्य मौतों की बढ़ती संख्या पर अंकुश लगाया जा सके।

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