रांची: केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 की यू-डायस रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में प्राथमिक से लेकर प्लस टू स्तर तक विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि इसके बावजूद ड्रॉपआउट दर के मामले में राज्य का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से बेहतर बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में सबसे अधिक विद्यार्थी हाईस्कूल स्तर पर पढ़ाई छोड़ रहे हैं। राज्य में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 9.5 प्रतिशत है।

हाईस्कूल और मध्य विद्यालय स्तर पर बढ़ी ड्रॉपआउट दर

यू-डायस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में झारखंड में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 3.50 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो गई। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर इसी अवधि में यह दर 11.5 प्रतिशत से घटकर 9.5 प्रतिशत पर आ गई है।

मध्य विद्यालय स्तर पर भी झारखंड में स्थिति चिंताजनक रही। यहां ड्रॉपआउट दर 1.70 प्रतिशत से बढ़कर 2.50 प्रतिशत हो गई। हालांकि प्राथमिक स्तर पर राज्य की ड्रॉपआउट दर केवल 0.1 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 0.3 प्रतिशत से कम है।

वर्ष 2025-26 में ड्रॉपआउट दर

शिक्षा स्तरराष्ट्रीय औसतझारखंड
प्राथमिक0.3%0.1%
उच्च प्राथमिक3.6%2.5%
माध्यमिक9.5%6.6%

राज्य में एक स्कूल में औसतन 169 विद्यार्थी

रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के प्रत्येक विद्यालय में औसतन 169 विद्यार्थी नामांकित हैं। यह राष्ट्रीय औसत के बराबर है। देशभर में भी प्रति विद्यालय औसतन 169 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं।

छात्र-शिक्षक अनुपात अब भी राष्ट्रीय औसत से पीछे

रिपोर्ट के मुताबिक प्राथमिक से लेकर प्लस टू स्तर तक झारखंड में औसतन 36 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक कार्यरत है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह अनुपात 24 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का है।

सबसे अधिक दबाव प्लस टू स्तर पर देखने को मिला है। वर्ष 2024-25 में जहां 47 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक कार्यरत था, वहीं अब यह बढ़कर 52 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक हो गया है। हालांकि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात में पहले की तुलना में कुछ सुधार दर्ज किया गया है।

झारखंड में छात्र-शिक्षक अनुपात

शिक्षा स्तरछात्र-शिक्षक अनुपात
प्राथमिक (कक्षा 1 से 5)25 : 1
उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8)23 : 1
माध्यमिक (कक्षा 9 से 10)30 : 1
उच्च माध्यमिक (कक्षा 11 से 12)52 : 1

रिपोर्ट से स्पष्ट है कि झारखंड में विद्यालय छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है, विशेष रूप से हाईस्कूल स्तर पर। वहीं छात्र-शिक्षक अनुपात में भी सुधार की आवश्यकता बनी हुई है, खासकर उच्च माध्यमिक स्तर पर जहां शिक्षकों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है।

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