रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को वार्ड तक पहुंचने से पहले ही भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के कई हिस्सों में फर्श टूटे हुए हैं, जिससे ट्रॉली और व्हीलचेयर पर ले जाए जा रहे मरीजों को लगातार झटके लगते हैं। सबसे अधिक दिक्कत गंभीर मरीजों को होती है। चिंताजनक बात यह है कि यह स्थिति पिछले तीन वर्षों से बनी हुई है।
टूटे फर्श से बढ़ रही गंभीर मरीजों की परेशानी
रिम्स की ओपीडी में प्रतिदिन 2,500 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि सेंट्रल इमरजेंसी में रोजाना 275 से ज्यादा गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। इनमें से 45 से 50 मरीजों को विभिन्न वार्डों तक ले जाने के दौरान टूटे फर्श और जर्जर रास्तों से गुजरना पड़ता है। मेडिसिन और सर्जरी आईसीयू के बाहर की स्थिति सबसे खराब बताई जा रही है, जहां प्रतिदिन 10 से 15 गंभीर मरीज भर्ती किए जाते हैं। मरीजों के परिजनों का कहना है कि वार्ड तक पहुंचाने के दौरान ही किसी अनहोनी का डर बना रहता है।
तीन साल पहले भी उठा था मुद्दा, फिर भी नहीं बदले हालात
अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर वर्ष 2023 में भी सवाल उठाए गए थे, लेकिन अब तक स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि मरम्मत कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिसका खामियाजा रोजाना मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
मरम्मत का दावा, लेकिन काम की रफ्तार धीमी
रिम्स के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. शिशिर कुमार ने बताया कि भवन के जीर्णोद्धार का कार्य जेएसबीसीसीएल को सौंपा गया है। फिलहाल भवन के बाहरी पिलरों को मजबूत करने का काम चल रहा है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से वार्डों की मरम्मत की जाएगी। हालांकि, अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार पर मरीजों और परिजनों ने नाराजगी जताई है।
100 कमरों वाला पेइंग वार्ड भी बदहाल
करीब 28 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 कमरों के पेइंग वार्ड की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। वर्तमान में केवल 76 कमरे ही उपयोग में हैं, जबकि 32 कमरे जर्जर होने के कारण मरम्मत की प्रतीक्षा में हैं। इसके बावजूद मरीजों से प्रति कमरा 1,500 रुपये प्रतिदिन शुल्क लिया जा रहा है।
पेइंग वार्ड में भर्ती मरीजों का कहना है कि कई कमरों की दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है। बाथरूम की स्थिति खराब है और कई कमरों में टीवी तथा फ्रिज जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि जब निजी अस्पताल जैसी सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है, तो व्यवस्थाएं भी उसी स्तर की होनी चाहिए।
फिलहाल दूसरे तल पर ही भर्ती किए जा रहे मरीज
रिम्स प्रशासन के अनुसार, पेइंग वार्ड के दूसरे तल का उपयोग निजी वार्ड के रूप में किया जा रहा है, जहां वर्तमान में पांच से छह मरीज भर्ती हैं। तीसरे तल का उपयोग आयुष्मान भारत योजना और इमरजेंसी से स्थानांतरित मरीजों के लिए किया जा रहा है, जबकि प्रथम तल पर 24 कमरों में डायलिसिस सेंटर संचालित है।
रिम्स प्रशासन ने सुधार का दिया भरोसा
रिम्स के पीआरओ डॉ. शिशिर कुमार ने बताया कि खराब स्थिति वाले 32 कमरों की मरम्मत के लिए स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर भवन निर्माण विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद पेइंग वार्ड पहले से बेहतर सुविधाओं के साथ संचालित किया जाएगा।
