राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में बढ़ा राजनीतिक तनाव
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। उम्मीदवार चयन को लेकर इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार की घोषणा के बाद झामुमो ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों सीटों पर अपना दावा जता दिया है, जिससे महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं।
गुरुवार देर रात कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के रूप में प्रणव झा के नाम की घोषणा की थी। इसके अगले ही दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर झामुमो विधायकों की आपात बैठक बुलाई गई, जिसमें राज्यसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
झामुमो विधायकों ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की वकालत की
बैठक में शामिल अधिकांश विधायकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि झामुमो को दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने चाहिए। नेताओं का मानना था कि कांग्रेस ने दबाव की राजनीति के तहत एकतरफा उम्मीदवार घोषित किया है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक के दौरान पार्टी विधायकों ने राज्यसभा चुनाव को लेकर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंप दिया। पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम ने भी मीडिया से बातचीत में कहा कि झामुमो दोनों सीटों पर चुनाव लड़ने के पक्ष में है।
कांग्रेस और झामुमो के दावों में दिखा मतभेद
कांग्रेस का दावा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत और सकारात्मक संकेत मिलने के बाद ही प्रणव झा के नाम की घोषणा की गई। वहीं झामुमो का कहना है कि मुख्यमंत्री ने 5 जून की शाम तक समय मांगा था, लेकिन कांग्रेस ने बिना अंतिम सहमति के उम्मीदवार घोषित कर दिया।
झामुमो नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से जल्दबाजी में निर्णय लिया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में नाराजगी बढ़ी है।
सत्ता समीकरण पर भी लगी अटकलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि झामुमो दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला करता है तो महागठबंधन के भीतर संकट और गहरा सकता है। राज्यसभा चुनाव संख्या बल और राजनीतिक रणनीति का चुनाव माना जाता है, ऐसे में दोनों दलों के बीच बढ़ती दूरी भविष्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
वर्तमान में कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं, जबकि दूसरी सीट पर जीत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आगे कौन-सी रणनीति अपनाते हैं।
रांची पहुंचे प्रणव झा, राजनीतिक गतिविधियां तेज
राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होने के बाद प्रणव झा रांची पहुंच चुके हैं और चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार उनकी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात भी हो सकती है।
वहीं कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू भी रांची में डेरा डाले हुए हैं और लगातार पार्टी नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं।
भाजपा की रणनीति पर भी नजर
महागठबंधन के भीतर बढ़ते तनाव के बीच भाजपा भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार के रूप में गौरव वल्लभ के नाम पर विचार कर सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
फिलहाल झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर असमंजस और हलचल का माहौल है। आने वाले दिनों में झामुमो और कांग्रेस के फैसले न केवल राज्यसभा चुनाव बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा पर भी असर डाल सकते हैं।

