चाईबासा : चाईबासा में उपायुक्त मनीष कुमार ने शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक की। समाहरणालय सभागार में आयोजित इस बैठक में डीसी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

हर महीने दो बार लगेगा रक्तदान शिविर

बैठक में डीसी ने निर्देश दिया कि जिले में रक्त की कमी के कारण किसी भी मरीज की जान नहीं जानी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक माह की 8 और 24 तारीख को अलग-अलग प्रखंडों में नियमित रूप से रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से भी स्वयं आगे आकर रक्तदान अभियान में भाग लेने की अपील की।

मलेरिया और टीबी पर विशेष फोकस

उपायुक्त ने मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों को लेकर चिंता जताई और गांव-गांव सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है।

बैठक में “100 डेज टीबी अभियान” की भी समीक्षा की गई। डीसी ने कहा कि संभावित टीबी मरीजों की शीघ्र पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अभियान को गंभीरता से चलाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया।

सिकल सेल और मातृ स्वास्थ्य पर जोर

डीसी ने सिकल सेल एनीमिया की जांच को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान सुनिश्चित की जाए ताकि समय पर उपचार मिल सके।

इसके साथ ही संस्थागत प्रसव को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रसव केंद्र विकसित किए जाएं ताकि महिलाओं को सुरक्षित प्रसव की सुविधा स्थानीय स्तर पर ही मिल सके।

जून में कृमि मुक्ति अभियान

बैठक में जानकारी दी गई कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम 15 और 18 जून को जिले में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान बच्चों को उम्र के अनुसार एल्बेंडाजोल दवा दी जाएगी ताकि कृमि संक्रमण से बचाव किया जा सके।

बैठक में सिविल सर्जन, अनुमंडल पदाधिकारी चक्रधरपुर, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

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