गढ़वा : मॉनसून के आगमन के साथ नदियों के बढ़ते जलस्तर, भूमि कटाव और अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए गढ़वा जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में सदर अनुमंडल दंडाधिकारी संजय कुमार ने पूरे सदर अनुमंडल क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
जारी आदेश के अनुसार, अनुमंडल क्षेत्र के सभी नदी घाटों, जल निकायों और उनके 200 मीटर के दायरे में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लागू रहेगा। यह आदेश अगले निर्देश तक अथवा एनजीटी द्वारा निर्धारित प्रतिबंध अवधि तक प्रभावी रहेगा।
इन नदियों और घाटों पर रहेगा प्रतिबंध
प्रशासनिक आदेश के दायरे में सोन नदी, कोयल नदी, बांकी नदी, दानरो नदी, यूरिया नदी, सरस्वतिया नदी सहित सदर अनुमंडल क्षेत्र के सभी प्रमुख जल निकाय शामिल हैं।
इस अवधि के दौरान इन नदी घाटों से किसी भी प्रकार का बालू खनन, चाहे वह मशीनों के माध्यम से हो या पारंपरिक तरीके से, पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। साथ ही बालू लदे ट्रैक्टर, हाइवा और अन्य वाहनों के परिचालन पर भी रोक लगाई गई है।
रात के समय नदी तटीय क्षेत्रों और बालू घाटों के आसपास लोगों की सामूहिक आवाजाही पर भी प्रतिबंध रहेगा।
पुलिस और खनन विभाग को मिली जिम्मेदारी
प्रशासन ने आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को सौंपी है। सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में गश्ती बढ़ाने और अवैध खनन गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा जिला खनन कार्यालय को अंचल अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर नियमित निरीक्षण करने तथा कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की भी होगी भागीदारी
अवैध बालू खनन के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन स्थानीय मुखिया, वार्ड सदस्य, जनप्रतिनिधियों तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों को भी इस मुहिम से जोड़ रहा है।
प्रशासन एक मजबूत सूचना तंत्र विकसित करने की तैयारी में है, ताकि अवैध खनन और परिवहन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी समय पर मिल सके और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जा सके।
उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 223, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, एनजीटी के प्रावधानों तथा झारखंड माइनिंग नियमावली के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही अवैध खनन और परिवहन में प्रयुक्त वाहनों को जब्त कर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा।
नागरिकों से सहयोग की अपील
सदर अनुमंडल दंडाधिकारी संजय कुमार ने आम लोगों से पर्यावरण संरक्षण और कानून के पालन में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी अवैध बालू खनन या परिवहन की गतिविधि दिखाई दे तो इसकी सूचना तुरंत निकटतम थाना, अंचल कार्यालय या एसडीएम कार्यालय को दें।
उन्होंने आश्वासन दिया कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
मॉनसून के दौरान पर्यावरण संरक्षण और नदी तंत्र की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन की इस पहल को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे अवैध खनन पर रोक लगाने के साथ-साथ नदी तटों के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
