रांची: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि डॉ. राजकुमार के पद छोड़ने का मुख्य कारण मेडॉल और हेल्थ मैप नामक जांच एजेंसियों के बकाया भुगतान को लेकर स्वास्थ्य विभाग के साथ हुआ विवाद था। उन्होंने पूरे मामले की सीआईडी जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व पूर्व स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका की जांच की मांग की है।

भुगतान को लेकर शुरू हुआ विवाद : सरयू राय

सरयू राय ने जारी बयान में कहा कि मेडॉल और हेल्थ मैप ने विभिन्न जांच सेवाओं के बदले करीब 100 करोड़ रुपये का बिल प्रस्तुत किया था। उनके अनुसार, पूर्व रिम्स निदेशक डॉ. कामेश्वर प्रसाद ने इस बिल का भुगतान करने से इनकार करते हुए आरोप लगाया था कि इसमें आधे से अधिक राशि फर्जीवाड़े से जुड़ी है।

उन्होंने कहा कि डॉ. कामेश्वर प्रसाद के बाद जब डॉ. राजकुमार ने निदेशक का पद संभाला तो उन पर भी बकाया राशि के भुगतान का दबाव बनाया गया। हालांकि डॉ. राजकुमार ने यह कहते हुए भुगतान से इनकार कर दिया कि यदि एजेंसियों की नियुक्ति स्वास्थ्य विभाग ने की है तो भुगतान भी विभाग ही करे या लिखित आदेश देकर आवश्यक राशि उपलब्ध कराए।

रिम्स की स्वायत्तता पर उठाए सवाल

सरयू राय ने आरोप लगाया कि इसी मुद्दे पर रिम्स निदेशक और स्वास्थ्य विभाग के बीच मतभेद बढ़े, जो अंततः डॉ. राजकुमार के इस्तीफे का कारण बने।

उन्होंने कहा कि रिम्स एक स्वायत्तशासी संस्था है और उसके संचालन का अधिकार शासी निकाय के पास है, लेकिन राज्य सरकार लगातार संस्थान के प्रशासनिक मामलों में हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने रिम्स अधिनियम और नियमावली का हवाला देते हुए कहा कि सरकार की भूमिका केवल नीतिगत दिशा-निर्देश देने तक सीमित है।

मेडॉल और हेल्थ मैप की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल

विधायक ने आरोप लगाया कि पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जांच के लिए मेडॉल और हेल्थ मैप की नियुक्ति रिम्स प्रबंधन से सलाह लिए बिना की गई थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के कार्यकाल में लिया गया था।

उन्होंने सरकार से पूछा कि इन एजेंसियों की नियुक्ति किस आधार पर की गई और इसका उद्देश्य क्या था। सरयू राय ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

53 करोड़ रुपये की देनदारी का किया दावा

सरयू राय के अनुसार, वर्तमान में मेडॉल और हेल्थ मैप पर रिम्स का करीब 38 करोड़ रुपये बकाया है, जबकि दोनों एजेंसियां जांच सेवाओं के मद में रिम्स से करीब 15 करोड़ रुपये की मांग कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुल 53 करोड़ रुपये की देनदारी रिम्स पर डालने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने मांग की कि इस मामले में तत्कालीन मंत्री, संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

सीआईडी जांच और हाईकोर्ट से जुड़े मामलों की भी जांच की मांग

सरयू राय ने मुख्यमंत्री से मांग की कि रिम्स के पूर्व निदेशक डॉ. डी.के. सिंह, डॉ. कामेश्वर प्रसाद और डॉ. राजकुमार के कार्यकाल में हुई घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि डॉ. राजकुमार को कथित रूप से अनुचित कार्यों के लिए दबाव का सामना करना पड़ा और उन्हें तीन बार झारखंड हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शासी निकाय की बैठक बुलाए बिना सदस्यों के हस्ताक्षर लेकर उन्हें हटाने की कोशिश की गई। सरयू राय ने कहा कि इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

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