रांची (झारखंड): राज्य में लंबे समय से नगर निकाय चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। इसी सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सत्तारूढ़ गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की अवमानना बताते हुए कहा कि “जनता इस सरकार को कभी माफ नहीं करेगी।”

नगर निकाय चुनाव में देरी पर झारखंड हाईकोर्ट की नाराज़गी

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में राज्य के मुख्य सचिव को स्वयं उपस्थित होकर स्पष्टिकरण देना होगा कि क्यों राज्य में नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं कराए गए। अदालत की यह सख्ती सरकार की निष्क्रियता और संवैधानिक जिम्मेदारी की अनदेखी पर आधारित है।

बाबूलाल मरांडी का आरोप: लोकतंत्र का हनन कर रही गठबंधन सरकार

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस-झामुमो गठबंधन लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। उन्होंने लिखा —

“माननीय उच्च न्यायालय ने नगर निकाय चुनाव नहीं कराने के लिए इस गठबंधन सरकार को जोरदार तमाचा मारा है। पांच वर्ष पहले कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद, राज्य के कई नगर निकाय प्रशासकों के हवाले चलाए जा रहे हैं।”

राज्य के शहरी क्षेत्रों में बिगड़ती बुनियादी सेवाएं

भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि शहरी क्षेत्रों में नालियों की सफाई नहीं हो रही, सड़कों की स्थिति जर्जर है और चारों ओर गंदगी का अंबार है। उन्होंने कहा कि

“शहरी जनता को नागरिक सुविधाएं देने के बजाय, यह सरकार राजनीतिक कुंठा में नगर निकाय चुनाव नहीं करा रही है, जिससे बुनियादी ढांचे का संकट उत्पन्न हो गया है।”

परिवारवाद और प्रशासनिक ठहराव पर भी जताई चिंता

मरांडी ने कांग्रेस-झामुमो गठबंधन पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि शहरी प्रशासन को चुनावों के माध्यम से चुने गए जनप्रतिनिधियों के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों के भरोसे छोड़ देना जनता के अधिकारों का हनन है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र को खत्म करने वाली इस प्रवृत्ति को जनता जवाब देगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल

राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच अब यह देखना अहम होगा कि झारखंड राज्य चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है। राज्य में 2 वर्षों से अधिक समय से नगर निकाय चुनाव लंबित हैं, जिससे स्थानीय शासन प्रणाली ठप पड़ी है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

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