रांची/जमशेदपुर: ख्यातिलब्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई के निधन पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई के निधन से भारतीय लोक कला और पंडवानी गायन परंपरा को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
अपने शोक संदेश में सरयू राय ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी गायिकी को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई। उन्होंने अपने लंबे कलात्मक जीवन में इस लोक विधा को लोकप्रिय बनाने के साथ-साथ अनेक पंडवानी गायक और गायिकाओं को तैयार किया, जो आज भी इस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
रांची के पर्यावरण मेले में छोड़ी थी अमिट छाप
सरयू राय ने वर्ष 2022 में रांची में आयोजित पर्यावरण मेला को याद करते हुए कहा कि उस आयोजन में तीजन बाई की प्रस्तुति ने आम जनमानस पर गहरी छाप छोड़ी थी। उनकी सशक्त गायन शैली और मंचीय प्रस्तुति लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बनी रहेगी।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई के निधन से पंडवानी गायिकी में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया
तीजन बाई भारतीय लोक संगीत की उन विरल कलाकारों में थीं, जिन्होंने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोकगायन शैली को राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों तक पहुंचाया। उनकी कला, समर्पण और साधना ने इस लोक परंपरा को नई पहचान दिलाई।
उल्लेखनीय है कि उन्हें वर्ष 1995 में प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके निधन पर कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है।

