रांची: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्त विभाग में विभिन्न योजनाओं की फाइलें लंबित रहने के मामले को गंभीरता से लिया है। इस संबंध में उन्होंने वित्त सचिव को पत्र लिखकर सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
यह कार्रवाई शनिवार को प्रकाशित एक समाचार के बाद की गई है, जिसमें वित्त विभाग में विभिन्न विभागों की योजनाओं से जुड़ी फाइलें लंबित रहने और इस पर मंत्रिपरिषद की बैठक में तीन मंत्रियों द्वारा आपत्ति जताए जाने का उल्लेख किया गया था।
सात दिनों में मांगी विस्तृत रिपोर्ट
वित्त मंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि मंत्रिपरिषद की बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं की फाइलें वित्त विभाग में लंबित रहने को लेकर उठाए गए सवाल अत्यंत गंभीर हैं। उन्होंने वित्त सचिव को निर्देश दिया है कि सभी संबंधित मामलों की तथ्यात्मक जानकारी सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित फाइलें वित्त विभाग को कब प्राप्त हुईं, किस स्तर पर और कितने समय तक लंबित रहीं, विभाग की ओर से यदि कोई आपत्ति या स्पष्टीकरण मांगा गया था तो उसका पूरा विवरण क्या था तथा संबंधित विभागों ने उस पर क्या जवाब दिया।
बिना कारण फाइलें रोकने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अधिकारी ने बिना उचित कारण के योजनाओं से संबंधित फाइलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखा, तो संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ सक्षम प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि वित्त विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर मंत्रिपरिषद की बैठक में की गई टिप्पणियों से विभाग की छवि प्रभावित हुई है। ऐसे में पूरे मामले की पारदर्शी जांच आवश्यक है।
इन विभागों की योजनाओं का किया गया उल्लेख
पत्र में वित्त मंत्री ने विशेष रूप से नगर विकास विभाग की पांच योजनाओं तथा ग्रामीण विकास विभाग की चार योजनाओं का उल्लेख किया है। इन सभी योजनाओं से संबंधित फाइलों की वर्तमान स्थिति, लंबित रहने के कारण और उनके निस्तारण की पूरी जानकारी रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
