रांची: राजधानी रांची में ऑटो और ई-रिक्शा स्टैंड की कमी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। शहर की सड़कों पर लगातार बढ़ रहे ऑटो और ई-रिक्शा के दबाव के बावजूद पर्याप्त स्टैंड की व्यवस्था नहीं होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसका असर रोजाना ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों, मरीजों और बाजार आने-जाने वाले लोगों पर साफ दिखाई दे रहा है।
लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर ऑटो और ई-रिक्शा चालक बीच सड़क या सड़क किनारे कहीं भी वाहन रोककर सवारियों का इंतजार करते हैं। इससे जाम की स्थिति बनती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
शहर में 23 हजार से अधिक ऑटो और ई-रिक्शा
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार रांची में 23 हजार से अधिक ऑटो और ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब 3 हजार डीजल ऑटो और लगभग 12 हजार सीएनजी ऑटो शामिल हैं। इसके बावजूद पूरे शहर में ऑटो और ई-रिक्शा के लिए केवल तीन आधिकारिक स्टैंड ही उपलब्ध हैं।
ये स्टैंड रातू रोड न्यू मार्केट, अरगोड़ा चौक और सेंट जेवियर्स कॉलेज के पास स्थित हैं। तेजी से बढ़ते वाहनों की संख्या के मुकाबले यह व्यवस्था अपर्याप्त मानी जा रही है।
आम लोगों को रोजाना हो रही परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऑटो चालक कई बार अचानक सड़क पर वाहन रोक देते हैं या सड़क किनारे खड़े होकर सवारी बैठाने लगते हैं। इससे पीछे चल रहे वाहनों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और जाम की स्थिति बन जाती है।
लोगों का कहना है कि दफ्तर पहुंचने, मरीजों को अस्पताल ले जाने और अन्य जरूरी कार्यों के दौरान इस अव्यवस्था के कारण अनावश्यक देरी होती है। यदि शहर के प्रमुख स्थानों पर अलग-अलग ऑटो स्टैंड बनाए जाएं, तो यातायात व्यवस्था अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकती है।
स्टैंड की कमी से चालक भी परेशान
रांची नगर निगम के अनुसार शहर में ऑटो और ई-रिक्शा के लिए केवल तीन स्थानों को ही आधिकारिक स्टैंड के रूप में चिन्हित किया गया है। अन्य स्थानों पर स्टैंड नहीं होने के कारण चालक मजबूरी में सड़क किनारे ही वाहन खड़े कर सवारियों का इंतजार करते हैं।
ऑटो एसोसिएशन के प्रतिनिधि दिनेश सोनी ने चालकों का पक्ष रखते हुए कहा कि शहर में 23 हजार से अधिक ऑटो और ई-रिक्शा चल रहे हैं, जबकि उनके लिए खड़े होने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने अब तक केवल करीब 5 हजार वाहनों को ही परमिट जारी किया है।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार और संबंधित विभाग शहर में पर्याप्त संख्या में ऑटो स्टैंड विकसित नहीं करेंगे, तब तक चालकों के पास सड़क किनारे वाहन खड़ा करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं रहेगा।
