सरायकेला: जिले में मानसून के दौरान सर्पदंश की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पिछले 24 घंटे में सर्पदंश के शिकार 10 मरीजों को इलाज के लिए सदर अस्पताल सरायकेला लाया गया। चिकित्सकों ने सभी मरीजों को समय पर एंटी-स्नेक वेनम देकर उपचार किया, जिसके बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
जून में 67 मरीज अस्पताल में भर्ती
सदर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में सर्पदंश के 67 मरीजों को अस्पताल के इनडोर वार्ड में भर्ती किया गया। सभी मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया और स्वस्थ होने के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।
साढ़े तीन वर्षों में 941 मामले दर्ज
अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच सर्पदंश के 779 मामले दर्ज हुए थे। वहीं जनवरी से जून 2026 के केवल छह महीनों में ही 162 मरीज सर्पदंश का शिकार होकर अस्पताल पहुंचे। इस प्रकार जनवरी 2023 से जून 2026 तक कुल 941 सर्पदंश के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें
सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह ने लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने या झाड़-फूंक और अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय पीड़ित को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचाएं।
उन्होंने सलाह दी कि सर्पदंश के बाद प्रभावित अंग को अनावश्यक रूप से न हिलाएं और मरीज को शांत रखें। अस्पतालों में एंटी-स्नेक वेनम और आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
सभी स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध है एंटी-स्नेक वेनम
सिविल सर्जन ने बताया कि सदर अस्पताल के अलावा जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है। आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को गांव-गांव जाकर लोगों को सर्पदंश से बचाव और समय पर उपचार के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बरसात के मौसम में बिलों में पानी भर जाने के कारण सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में घरों और रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में लोगों को विशेष सावधानी बरतने और सर्पदंश की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है।
