रांची: झारखंड में लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। राज्य सरकार वर्षों से अनुपयोगी पड़े चापाकलों को अब रिचार्ज पिट में बदलने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत वर्षा जल को सीधे जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर बढ़ाने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
बेकार पड़े चापाकलों की तैयार हो रही सूची
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभाग ने सभी प्रमंडलों से ऐसे जर्जर और वर्षों से अनुपयोगी पड़े चापाकलों की सूची मांगी है, जिनका पिछले 25 से 30 वर्षों से उपयोग नहीं हो रहा है।
इसके साथ ही इन चापाकलों की भौगोलिक स्थिति की जानकारी भी जुटाई जा रही है, ताकि कार्य शुरू होने पर किसी प्रकार की तकनीकी बाधा न आए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि चयनित चापाकल किसी निजी आवास या चहारदीवारी के अत्यधिक निकट न हों।
जानकारी के अनुसार, एक रिचार्ज पिट तैयार करने पर लगभग 80 से 82 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है।
चार वर्षों में बढ़ा भूजल दोहन
सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की नवंबर 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में भूजल दोहन लगातार बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 में राज्य में भूजल निकासी 29.13 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2024 में बढ़कर 31.42 प्रतिशत यानी लगभग 1.81 बिलियन घन मीटर तक पहुंच गई है।
बोर्ड ने राज्य की 263 इकाइयों का सर्वेक्षण किया, जिसमें धनबाद और कोडरमा को सबसे अधिक भूजल दोहन वाले जिले पाया गया। धनबाद में 73.24 प्रतिशत और कोडरमा में 65.74 प्रतिशत भूजल का दोहन हो चुका है।
वहीं, रांची (शहरी), सिल्ली, रामगढ़, जयनगर, धनबाद (शहरी) और तोपचांची समेत छह इकाइयों को अत्यंत चिंताजनक श्रेणी में रखा गया है, जबकि 12 अन्य इकाइयों को अर्ध चिंताजनक श्रेणी में शामिल किया गया है।
क्या है रिचार्ज पिट और कैसे करेगा काम?
रिचार्ज पिट वर्षा जल संचयन की एक प्रभावी और प्राकृतिक तकनीक है, जिसका उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर नष्ट होने से बचाना और उसे जमीन के भीतर पहुंचाना है।
इसके तहत चापाकल के समीप एक से तीन मीटर गहरा और चौड़ा गड्ढा बनाया जाता है। इस गड्ढे में सबसे नीचे बड़े पत्थर, उसके ऊपर छोटे पत्थर और सबसे ऊपर मोटी रेत की परत बिछाई जाती है।
बारिश का पानी इन परतों से छनकर प्राकृतिक रूप से शुद्ध होता है और धीरे-धीरे जमीन के भीतर रिसकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। इससे वर्षा जल का संरक्षण भी होता है और भूजल भंडार को पुनर्भरित होने का अवसर मिलता है।
मंत्री ने कही यह बात
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य में तेजी से गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए वर्षों से बेकार पड़े मृतप्राय चापाकलों को रिचार्ज पिट में बदलने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने बताया कि सभी प्रमंडलों से ऐसे चापाकलों की सूची मांगी गई है। प्रस्ताव को जल्द ही मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, ताकि योजना पर शीघ्र कार्य शुरू किया जा सके।
