लातेहार: लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड स्थित प्रसिद्ध सुरकई वाटरफॉल को वन विभाग ने पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। क्षेत्र में भालुओं की बढ़ती गतिविधियों और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महुआडांड़ वन प्रक्षेत्र ने यह निर्णय लिया है।
वन विभाग ने जारी की चेतावनी
वन विभाग ने सुरकई वाटरफॉल से करीब चार किलोमीटर पहले चेतावनी बोर्ड लगाया है। बोर्ड में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह क्षेत्र भालू प्रभावित है और यहां जंगली भालुओं की लगातार आवाजाही रहती है।
वन विभाग ने बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के आगे जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि बिना अनुमति वन क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 और भारतीय वन अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मानसून में बढ़ती है पर्यटकों की भीड़
झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित सुरकई वाटरफॉल मानसून के दौरान प्राकृतिक सौंदर्य के कारण बड़ी संख्या में पर्यटकों और पिकनिक मनाने वालों को आकर्षित करता है। हालांकि, हाल के दिनों में जंगली जानवरों, विशेषकर भालुओं की बढ़ी गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग ने एहतियात के तौर पर यह प्रतिबंध लगाया है।
सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता : वनपाल
महुआडांड़ वन विभाग के वनपाल गुरु दयाल सिंह ने बताया कि पर्यटकों की जान-माल की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। क्षेत्र में भालुओं की सक्रियता बढ़ने के कारण अस्थायी रूप से प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
उन्होंने कहा कि स्थिति सामान्य होने और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम पूरे होने के बाद ही सुरकई वाटरफॉल को दोबारा आम पर्यटकों के लिए खोला जाएगा।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जारी निर्देशों का पालन करें और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न करें। यदि किसी को विशेष अनुमति की आवश्यकता हो, तो वह महुआडांड़ वन कार्यालय से संपर्क कर सकता है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग के इस फैसले पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है, हालांकि अधिकांश लोगों ने पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए इस निर्णय का समर्थन किया है।

